मुहावरों के प्रकार - types of idioms

मुहावरों के प्रकार - types of idioms


मुहावरों का प्रयोग अत्यन्त व्यापक है। दैनिक जीवन में विविध रूपों में इनका प्रयोग किया जाता है। भारतीय लोक-साहित्य में इनका अक्षय भण्डार उपलब्ध होता है। इनके अर्थ, भाषाई स्रोत, दैनिक जीवन से सम्बन्धित क्रियाओं के आधार पर इनका वर्गीकरण इस प्रकार किया जा सकता है-


1. अर्थ की दृष्टि से मुहावरे में निहित अर्थ के आधार पर मुहावरों को पुनः चार वर्गों में बाँटा जा सकता है-


i. अश्लील मुहावरे। उदाहरणार्थ धूल चटाना, कीड़े पड़ना।


ii. श्लील मुहावरे। उदाहरणार्थ पेट में चूहे कूदना ।


iii. विलोमार्थी मुहावरे उदाहरणार्थ- गुल खिलाना (कोई बखेड़ा खड़ा करना)। iv. समानार्थक मुहावरे। उदाहरणार्थ अक्ल का दुश्मन होना (मूर्ख)।


2. भाषाई स्रोत की दृष्टि से भारत के विभिन्न प्रदेशों में प्रचलित मुहावरे विभिन्न देशी-विदेशी भाषाओं से आकर लोक में इस प्रकार सम्मिलित हो गए हैं कि आज वे अपनी ही सम्पत्ति प्रतीत होते हैं। इन मुहावरों को हम संस्कृत, अरबी-फ़ारसी और अंग्रेजी भाषा से सम्बन्धित मुहावरों के वर्ग में बाँट सकते हैं-


1. संस्कृत के मुहावरे उदाहरणार्थ सूचिमेद्यं तमः (अत्यधिक अन्धकार होना) ।


ii. अरबी-फ़ारसी मुहावरे । उदाहरणार्थ ईद का चाँद होना (बहुत कम दिखाई देना) । iii. अंग्रेजी मुहावरे। उदाहरणार्थ- जीभ का फिसलना (स्लिप ऑफ टंग)।


3. प्रकार की दृष्टि से दैनिक जीवन के क्रिया-कलापों और शारीरिक-मानसिक क्रियाओं पर आधारित मुहावरों को पुनः दो वर्गों में बाँटा जा सकता है -


1. शरीराश्रित मुहावरे उदाहरणार्थ काया कल्प होना, बदन में आग लगना।


ii. दैनिक जीवन सम्बन्धी मुहावरे उदाहरणार्थ नमक मिर्च लगाना, घास काटना ।


उपर्युक्त वर्गीकरण के अतिरिक्त मुहावरों के कुछ और प्रकार भी हैं जैसे-


1. ऐतिहासिक पौराणिक घटनाओं पर आधारित मुहावरे उदाहरणार्थ राजा हरिश्चन्द्र होना, कुम्भकरण होना।


2. जाति आधारित मुहावरे । उदाहरणार्थ- धोबी का कुत्ता होना, बछिया का ताऊ होना ।


3. संस्कार - प्रथाओं पर आधारित मुहावरे उदाहरणार्थ- हल्दी लगाना, क्रियाकर्म करना ।