हिन्दी की विभिन्न जनपदीय बोलियाँ - Various regional dialects of Hindi
हिन्दी की विभिन्न जनपदीय बोलियाँ - Various regional dialects of Hindi
भारत में अंग्रेज अधिकारी भले ही शासन करने की दृष्टि से आये थे लेकिन उनकी रुचि यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर और सम्पदा में भी बढ़ने लगी। यह स्वाभाविक भी था। इसके पीछे दो कारण थे (i) उनकी व्यक्तिगत अभिरुचि (ii) इन अध्ययनों द्वारा यहाँ की जनता को समझना और उनसे निकटता स्थापित करने का प्रयास करना । वे यहाँ के मेलों, रीति-रिवाजों, शादी-ब्याह, मान्यता, विचित्र अन्धविश्वासों के प्रति आकर्षित हुए ।
अंग्रेजों ने ही लोक धरोहर को लिपिबद्ध करवाया। अंग्रेज अध्ययनकर्त्ताओं के समानान्तर ही भारतीय विद्वानों ने भी इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया। भारत में लोक-साहित्य का सर्वेक्षण, संकलन, संग्रह, अध्ययन, अनुसन्धान का शुभारम्भ विदेशी विद्वानों द्वारा किया गया। "सन् 1784 में (एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल) के द्वारा इसकी नींव पड़ी थी पर कर्नल टॉड द्वारा इसका शुभारम्भ माना गया है। "
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