भिखारीदास रीति-निरूपण - beggar slave characterization
आचार्य भिखारीदास ने वृत्यनुप्रास अलंकार के अन्तर्गत रीतियों का उल्लेख किया है। उन्होंने वृत्यनुप्रास के दो भेद स्वीकार किए हैं पहला, एक वर्ण की आवृत्ति और दूसरा, अनेक वर्णों की आवृत्ति । वृत्यनुप्रास वस्तुतः वृत्तियों पर आधारित है। ये वृत्तियाँ तीन प्रकार की होती हैं- उपनागरिका, परुषा व कोमला, जो क्रमशः माधुर्य, ओज और प्रसाद गुणों के व्यंजक वर्णों से युक्ति होती है। इस सन्दर्भ में 'काव्यनिर्णय' की निम्नलिखित पंक्तियाँ द्रष्टव्य हैं-
कहुं सरि अनेक की परै अनेकन बार। एकहि की आवृत्ति कहुं, वृत्त्यौ दोइ प्रकार ॥
मिले बरन माधुर्य के उपनागरिका नित्ति । परुषा ओज प्रसाद के मिले कोमला वृत्ति ॥
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