वैचारिक बनावट - conceptual design
लम्बी कविताओं में कथाओं, सन्दर्भों, संकेतों और उद्धरणों का चित्रण रहता है जो परस्पर अन्तर्संयोजित होकर कविता की मूल संवेदना को गहराने में सहायक होते हैं। इसके साथ ही विविध भावनाएँ, मनोदशाएँ और विचार लम्बी कविता की संरचना को एक अलग रचना रूप प्रदान करते हैं। 'राम की शक्ति-पूजा' में भी विविध प्रसंगों की सृष्टि की गई है और ये प्रसंग परस्पर सम्बद्ध होकर कविता के स्वरूप को और अधिक प्रभावी बना रहे हैं ।
'राम की शक्ति-पूजा' का काव्यरूप विवादास्पद रहा है कुछ विद्वान् इसकी महाकाव्यात्मक गरिमा और औदात्य को स्वीकार करते हुए इसे महाकाव्य की संज्ञा देते हैं तो अन्य राम के जीवन के खण्ड चित्र के वर्णन के कारण इसे खण्डकाव्य के रूप में स्वीकार करते हैं। एक अन्य वर्ग का मानना है कि 'राम की शक्ति-पूजा' में खण्डकाव्य के लिए अपेक्षित विस्तार नहीं है अतः यह आख्यानात्मक लम्बी कविता की श्रेणी में रखी जा सकती है । डॉ. नरेन्द्र मोहन के शब्दों में " 'राम की शक्ति-पूजा' निराला की महत्तम कृति है। जिसे महाकाव्यात्मक गुणों से सुशोभित कविता माना ही जाता है,
लेकिन इसके औदात्य के आधार पर रस, अलंकार की व्याख्या ही न करके हमारी दृष्टि मिथकीय आख्यान के साथ नायक राम और पात्रों के अन्तर्द्वन्द्व पर गहराती है। इस लम्बी कविता में मिथकीय संयोजन की संगति परस्परगुम्फित भावनाओं, कल्पनाओं और विचारों में है। भावनाओं और मनोदशा के सान्निध्य और टकराव से यह कविता लम्बी हो गई हैं। अतीत प्रसंगों में प्रतिगमन या प्रत्यावर्तन आनुषांगिक प्रसंगों, असम्बद्ध भावनाओं और बिम्बों को दृढ़तापूर्वक कविता की केन्द्रीय स्थिति से जोड़ देते हैं।" स्पष्ट है कि 'राम की शक्ति-पूजा' लम्बी कविता के रचना तत्त्वों से युक्त होने के साथ ही महाकाव्यात्मक गुणों को अपने कलेवर में समेटे हुए है और अपने कथ्य को अभिव्यक्त करने में पूर्णतः सफल है।
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