डॉ. रामविलास शर्मा की आलोचना-दृष्टि: विधेयात्मक मूल्यों की प्रतिष्ठा - Criticism of Dr. Ram Vilas Sharma: Prestige of Predicate Values

डॉ० रामविलास शर्मा का आलोचनात्मक लेखन, एक प्रकार से, साहित्यिक संवाद की वैचारिक उपलब्धि है। हिन्दी साहित्य के अन्तर्विरोधों और साहित्यिक समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया में ही उनके अधिकांश आलोचना-प्रतिमान विकसित हुए हैं। अपने वैचारिक संघर्ष में उन्होंने साहित्य सम्बन्धी अनेक मान्यताओं की पुनर्व्याख्या की है, उनका सही अर्थ सामने रखा है और साहित्य की रचना और आलोचना सम्बन्धी अनेक भ्रमों का निवारण किया है। आइए, उनके इस वैचारिक संघर्ष का अवलोकन करें।