बिम्ब, विवरण और विचार का समीकरण - the equation of image, description and idea
'राम की शक्ति-पूजा' में भी बिम्ब कभी कविता की घुरी बनकर विचारों और विवरणों को संचालित संयोजित करता है तो कभी विचार कविता के केन्द्र में स्थापित होकर बिम्बों और विवरणों को क्रमबद्धता और संगति प्रदान करता है।
राम जब युद्ध में विजय के प्रति संशयग्रस्त होते हैं तो उन्हें सीता का स्मरण हो आता है। वे अपने प्रेम के क्षणों को याद कर भावुक हो जाते हैं और सीता की छवि में खो जाते हैं, इस दशा का विवरण कविवर निराला ने इस प्रकार दिया है-
ऐसे क्षण अन्धकार घन में जैसे विद्युत, जागी पृथ्वी- तनया-कुमारिका छवि, अच्युत
ज्योति प्रपात स्वर्गीय ज्ञात छवि प्रथम स्वीय, जानकी नयन कमनीय प्रथम कम्पन तुरीय।
निराला ने सम्पूर्ण कविता में अनेक छोटे-बड़े बिम्बों का सृजन किया है, जैसे युद्ध से पराजित मन से लौटते राम का बिम्ब, युद्ध के वातावरण के बिम्ब, जनकपुर वाटिका में सीता का स्मृत-शृंगारी मुद्राओं का बिम्ब, शक्ति का दस भुजा, सिंह-आसीन, निर्भय करने वाला बिम्ब आदि। इन बिम्बों की सृष्टि ने 'राम की शक्ति-पूजा' के प्रभाव को बढ़ा दिया है।
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