डॉ. रामविलास शर्मा का साहित्य में शाश्वत सत्य और सामयिकता - Eternal truth and topicality in the literature of Dr. Ram Vilas Sharma
डॉ. रामविलास शर्मा का साहित्य में शाश्वत सत्य और सामयिकता - Eternal truth and topicality in the literature of Dr. Ram Vilas Sharma
डॉ. रामविलास शर्मा साहित्य में शाश्वत और स्थायी सत्य के चित्रण को अस्वीकार करते हैं। मार्क्सवादी चिन्तन के अनुसार वे सत्य को ऐतिहासिक विकास क्रम में देखते हैं। उनका विचार है कि समय के प्रवाह और गति को नज़रअंदाज़ करके स्थायी साहित्य का सृजन नहीं किया जा सकता। ऐतिहासिक विकास क्रम को समझकर ही स्थायी महत्त्व का साहित्य रचा जा सकता है।
साहित्यकार स्थायी साहित्य की रचना तभी कर सकता है जब वह अस्थायी लगने वाली स्थितियों का चित्रण करे। डॉ. शर्मा ने लिखा है कि "सामयिक संघर्ष में आधुनिक साहित्य जितना ही तपेगा, उसका रंग-रूप उतना ही निखरेगा। इस संघर्ष से दूर रहकर यदि लेखक सोने की कलम से भी काल्पनिक सपनों के गीत लिखेगा तो उसकी कलम और साहित्य का मूल्य दो कौड़ी से ज्यादा का न होगा।" (- 'मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य' )
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