राष्ट्रीय चेतना - national consciousness
राष्ट्रीयता से तात्पर्य
'राष्ट्र' शब्द एक विशिष्ट देश या जाति से पृथक् होता है। किसी देश या जाति का इतिहास उसका उत्थान-पतन और उसकी संस्कृति, सभ्यता सभी राष्ट्रीय सम्पत्ति के रूप में प्रतिष्ठित होती है और एक स्थानीय विशेषता को लिए होती है जो मानव मात्र को सामान्य भूमि से इस सम्पत्ति से अलग करती है। इसी विशेषता के आधार पर जातिगत एकता का सूत्र मान्य रहता है। इस एकता का सूत्र के साथ रागात्मक सम्बन्ध और उसकी सुरक्षा के प्रति कर्त्तव्य सामान्य रूप से राष्ट्रीयता के अन्तर्गत आते हैं। राष्ट्रीयता के इस व्यापक अर्थ के साथ एक विशेष अर्थ भी मान्य है । जब एक देश या जाति वर्ग अपने अन्धकार, अपनी दुर्बलता या एकता की शिथिलता के कारण अपने अधिकारों से वंचित हो जाता है तथा एक विजेता उसके श्रम एवं सम्पत्ति का शोषण करता है,
तब असंतोष जन्म लेता है। निरन्तर बढ़ता यह असंतोष थोड़ा-थोड़ा एकत्रित हो एक ज्वालामुखी में परिवर्तित हो जाता है। विच्छिन्न एकता का सूत्र इस वातावरण में क्रान्ति के रूप में जन्म लेता है। सभी पहले के वैभव और अधिकारों को पुनः प्राप्ति के लिए जो क्रान्तिशील प्रयत्न करती है, सीमित रूप में इसी अन्तर्बाह्य संघर्ष को राष्ट्रीयता के नाम से चिह्नित किया जाता है। जब हम भृत्य राष्ट्रीयता की बात करते हैं तो सामान्यतः अपने इतिहास की समस्त शक्तियों का सबल लेकर और एकता सूत्र में दृढ आस्था रखते हुए किये गए प्रयत्नों से ही हमारा अभिप्राय होता है। कोई भी जागरूक कलाकार इन प्रयत्नों के प्रति अन्यमनस्क नहीं रह सकता। दिनकर इसी राष्ट्रीय क्रान्ति की भूमिका को लेकर उपस्थित हुए।
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