नवगीत: अर्थ एवं महत्त्व - Navgeet: Meaning and Importance

नवगीत 'नवता' और 'गीतत्व' का संश्लिष्ट रूप है। नवता उसके युगानुरूप परिवर्तन की परिचायक विशेषता है, गीतत्व उसका मूल काव्य-रूप है। शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से जिसे गाया गया है, वह गीत है। गा, गातृ, गातु आदि का प्रयोग वैदिक साहित्य में भी गाने के अर्थ में ही हुआ है। प्रत्येक साहित्यिक विधा की भाँति 'नवगीत' ने भी अनेक पारिभाषिक विशेषताओं को भी क्रमशः अर्जित किया है। गीत मानस हृदय के संवेगों को व्यक्त करने की आकुलता का परिणाम है। मनुष्य जब-जब अपने मन में व्युत्पन्न सुख-दुःख, राग-विराग की सम्वेदना को व्यक्त करने के लिए बेचैन हुआ, तब-तब गीत का जन्म हुआ। 'नवगीत' भी इसी परम्परा की एक कड़ी है।