नयी कविता की काव्यभाषा का नयापन - The newness of the poetic language of the new poem
समीक्षकों की लेखनी से यह स्वर उभरने लगा कि प्रयोगवाद नवलेखन की एक भूमिका मात्र रहा। उसकी प्रकृति में निहित अस्थिरतामूलक तत्त्वों के आधार पर कुछ नये प्रयोग किये गए थे। इन्हीं में से कुछ सफल प्रयोगों को नींव स्वरूप मानकर नयी कविता का अविर्भाव हुआ। इसी चर्चा के क्रम में जगदीश गुप्त और रामस्वरूप चतुर्वेदी ने 'नयी 'कविता' का पहला अंक निकाला। पश्चात् धर्मवीर भारती और लक्ष्मीकान्त वर्मा के सम्पादन सहयोग से 'निकष' पत्रिका का आरम्भ किया गया। अज्ञेय को 'नयी कविता' नाम भा गया। गिरिजाकुमार माथुर और मुक्तिबोध जैसे दिग्गज कवियों ने क्रमशः 'नयी कविता : सीमाएँ और संभावनाएँ तथा 'नयी कविता का आत्मसंघर्ष जैसे पुस्तकों की रचना की।
यह और कुछ ऐसे ही सारस्वत प्रयासों के फलस्वरूप 'नयी कविता' नाम चल पड़ा। चहुँ ओर नयी कविता का डंका बजने लगा।
प्रयोगवाद और नयी कविता के बीच के अन्तर को अलगाने और नयी कविता की विशेषताओं को अधोरेखित करने के उपक्रम किये जाने लगे। नयी कविता की विशेषताओं को जानना, इस सन्दर्भ में उपयुक्त सिद्ध होगा क्योंकि इन्हीं विशेषताओं की पड़ताल करने के पश्चात् नयी कविता का नयापन, नयी कविता की काव्यभाषा का नयापन इत्यादि उभरकर आएगा।
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