डॉ. रामविलास शर्मा की व्यावहारिक आलोचना - Practical criticism of Dr. Ram Vilas Sharma

हिन्दी साहित्य के विवेचन और मूल्यांकनसम्बन्धी डॉ. रामविलास शर्मा का लेखन इतना व्यापक और बहुआयामी है कि उसमें उन्होंने हिन्दी के सभी युगों और साहित्यिक प्रवृत्तियों को समेट लिया है। विधिवत इतिहास न होते हुए भी यह लेखन हिन्दी साहित्य का वृहद् इतिहास हमारे सामने प्रस्तुत करता है। इस इतिहास में यथार्थवादी, मानवीय और सामाजिक विकास की दृष्टि से प्रगतिशील प्रवृत्तियों को उभारा गया है तथा व्यक्तिवादी, निराशावादी, जन-विरोधी और आस्थाहीन प्रवृत्तियों पर तीव्र प्रहार करते हुए उनका विरोध किया गया है।

उनका विविधतापूर्ण विशाल लेखन विवादपूर्ण भी रहा, परन्तु वो अपनी मान्यताओं पर अडिग रहे और पूरी गम्भीरता के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर आगे बढ़ते रहे।


काव्यालोचना


डॉ. रामविलास शर्मा ने भक्तिकाल से लेकर नयी कविता तक के हिन्दी काव्य की मुख्य प्रवृत्तियों और कवियों का मूल्यांकन किया है। तुलसी निराला और केदारनाथ अग्रवाल आपके प्रिय कवि हैं। प्रायः अन्य कवियों के मूल्यांकन में इन तीन कवियों की कविता प्रतिमान के रूप में उनके सामने रहती है। उनकी काव्यालोचना के विभिन्न रूपों का संक्षिप्त विवेचन यहाँ प्रस्तुत है।