डॉ. रामविलास शर्मा साहित्य का उद्देश्य और प्रगतिशील साहित्य - Purpose of Dr. Ramvilas Sharma literature and progressive literature
साहित्य मनुष्य के सामाजिक विकास का परिणाम है इसलिए सामाजिक विकास के साथ उसका गहरा सम्बन्ध है। डॉ० रामविलास शर्मा के अनुसार साहित्य का मुख्य उद्देश्य शोषणमुक्त समाज की स्थापना की दिशा में सामाजिक विकास को गति प्रदान करना है। जो साहित्य मनुष्य को श्रेष्ठ विचार नहीं देता और उन विचारों को कार्य में परिणत करने की प्रेरणा नहीं देता वह साहित्य व्यर्थ है। इस दृष्टि से साहित्य की रचना समाज के विकास और मनुष्य के व्यक्तिगत विकास दोनों के लिए होनी चाहिए। डॉ. शर्मा साहित्य को मानव जीवन के लिए एक आवश्यक कार्यवाही और मनुष्यों को संगठित करने और उनके जीवन को बदलने का साधन मानते हैं।
उनके अनुसार साहित्य दुनिया को बदलने के लिए बहुत बड़ा साधन है और जिस हद तक वह साधन बनता है उस द तक ही साध्य रूप में भी उसकी सफलता है।
डॉ. शर्मा साहित्य की प्रगतिशीलता के प्रश्न को समाज पर साहित्य के अच्छे और बुरे प्रभाव के प्रश्न के रूप में देखते हैं। उन्होंने लिखा है कि “प्रगतिशील साहित्य से मतलब उस साहित्य से है जो समाज को आगे बढ़ाता है, मनुष्य के विकास में सहायक होता है।"
(- 'मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य') लेकिन क्या प्रगतिशील होने से ही साहित्य श्रेष्ठ हो जाता है ? डॉ. शर्मा का उत्तर है कि "प्रगतिशील साहित्य तभी प्रगतिशील है जब वह साहित्य भी है। यदि वह मर्मस्पर्शी नहीं है, पढ़ने वाले पर उसका प्रभाव नहीं पड़ता है, तो सिर्फ नारा लगाने से या प्रचार की बात करने से वह श्रेष्ठ साहित्य क्या, साधारण साहित्य भी नहीं हो सकता।" (- 'मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य') प्रगतिशील साहित्य अश्लीलता, निराशावाद, कुण्ठित मानसिकता, अन्धविश्वास, साम्प्रदायिकता और व्यक्तिवाद का विरोधी है। वह मानव मात्र की समानता और शोषणमुक्त समाज का निर्माण करने वाला साहित्य है।
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