मिथक के प्रकार - types of myth
मिथक का क्षेत्र बहुत व्यापक है और उसका विस्तार असीमित है। कुछ विद्वानों ने इसे कई प्रकारों में विभाजित किया है। ए. जी. गार्डनर ने मिथक को निम्नानुसार विभाजित किया है-
ऋतु परिवर्तन एवं प्राकृतिक परिवर्तन से सम्बन्धित मिथक
प्राकृतिक तत्त्वों से सम्बन्धित मिथक
विशिष्ट प्राकृतिक तत्त्वों से सम्बन्धित मिथक
सृष्टि उत्पत्ति से सम्बन्धित मिथक
देवोत्पत्ति से सम्बन्धित मिथक
मानव एवं पशु उत्पत्ति से सम्बन्धित मिथक
रूपान्तरण एवं आवागमन से सम्बन्धित मिथक
चरित नायक, परिवार एवं राष्ट्र से सम्बन्धित मिथक
सामाजिक संस्थाओं एवं आविष्कारों से सम्बन्धित मिथक
मृत्यु एवं स्वर्ग नरक सम्बन्धी मिथक
दानवों एवं राक्षसों से सम्बन्धित मिथक
प्रख्यात एवं ऐतिहासिक घटनाओं से सम्बन्धित मिथक
ए. जी. गार्डनर के इस वर्णन में अतिव्याप्ति दोष है। इसमें अनावश्यक विस्तार है। एच. जे. रोज ने मिथकों के तीन प्रकार ही किए हैं-
सृष्टि सम्बन्धी मिथक
प्रलय सम्बन्धी मिथक
देवताओं के प्रणयाचार सम्बन्धी मिथक
डॉ० नगेन्द्र ने प्राकृतिक पदार्थों का सम्बन्ध भी मिथक से माना है। इन्होंने मिथक के चार प्रकार बताये हैं-
(1) उत्पत्ति सम्बन्धी मिथक
(ii) प्रलय सम्बन्धी मिथक
(iii) चरित नायकों अथवा दैवीय चरित्रों (देव-दानव) के प्राचीन एवं ऐतिहासिक वृत्त
(iv) प्रकृति सम्बन्धी मिथक
काव्य के अध्ययन के लिए डॉ. नगेन्द्र का मिथकों का वर्गीकरण उचित प्रतीत होता है।
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