हिन्दी शब्दों में स्वरों के उच्चारित रूप - Accented forms of vowels in Hindi words

(1) अ, ए तथा ऐ स्वरों के उच्चारित रूप हिन्दी में 'अ', 'ए' तथा 'ऐ' तीन ऐसे स्वर हैं जिनके उच्चारण - में अलग-अलग सन्दर्भों में अन्तर आ जाता है। यहाँ हम प्रत्येक स्वर के उच्चारित रूपों की चर्चा अलग- अलग करेंगे


(i) अ-स्वर -


"अ' स्वर का हिन्दी में दो प्रकार से किया जाता है। '' व्यंजन के पूर्व 'अ' स्वर का उच्चारण 'अ' के रूप में न होकर 'ऍ' स्वर जैसा हो जाता है, जबकि अन्य स्थानों पर 'अ' की भाँति ही होता है; जैसे -


सामान्य स्थिति में उच्चारण


असर, अमर, पल,

कहना


'अ' की भांति


'हू' व्यंजन के पूर्व उच्चारण


'ए' की भांति


शहर शहर


'ए' की भाँति


(ii)


ऐ/औ स्वर-


कहना > कहना


'अ' स्वर की ही भाँति ही हमें हिन्दी में 'ऐ/ औ' स्वरों के भी दो-दो प्रकार के उच्चारण प्राप्त होते हैं। सामान्य स्थिति में तो इनके उच्चारण यथावत रूप में ही रहते हैं, जैसे ऐनक, - थैला, पैसा, मैला तथा और, औरत, कौन, मौन, सौ आदि। परन्तु जब 'ऐ' स्वर का उच्चारण 'यू' के पूर्व तथा 'औ' का उच्चारण 'व्' के पूर्व होता है तब इनका उच्चारण क्रमश: 'अइ' ('अ+इ' का संयुक्त रूप) तथा 'अउ' ('अ+उ' का संयुक्त रूप) के रूप में किया जाता हैं।



(2) स्वर आगम -


हिन्दी में संयुक्त व्यंजनों से बनने वाले व्यंजन गुच्छों को तोड़ने की प्रवृत्ति पाई जाती है। यह कार्य व्यंजन- गुच्छ के आदि या मध्य में किसी स्वर का आगम कर लिया जाता है।

यह प्रवृत्ति संस्कृत से आए तत्सम शब्दों के अलावा अरबी, फारसी, अंग्रेजी आदि भाषाओं से आए शब्दों के साथ भी देखी जा सकती है, जैसे-


(3) अ-लोप की स्थिति-


जिस तरह कुछ शब्दों का उच्चारण करते समय अ-स्वर का आगम होता है ठीक इसके विपरीत कुछ स्थितियों में अ-स्वर का लोप कर दिया जाता है। हिन्दी शब्दों में अ-लोप दो स्थितियों में दिखाई देता है- 'शब्दान्त में' तथा 'शब्द के मध्य में' शब्दान्त में अ-लोप। हिन्दी के शब्दों के अन्त में आने वाले 'अ' स्वर का उच्चारण नहीं किया जाता या उसका लोप कर दिया जाता है। यद्यपि लिखते समय हम व्यंजन पर हलन्त नहीं लगाते पर अन्तिम 'अ' का उच्चारण नहीं किया जाता।

उदाहरण के लिए हिन्दी भाषाभाषी 'नाम' तथा 'अहम्' शब्दों के अन्त में आने वाले 'म्' का उच्चारण तो समान रूप से करता है लेकिन लिखते समय 'नाम' के 'म' पर हलन्त नहीं लगाया जाता । वस्तुतः इन शब्दों के


उच्चारित एवं लिखित रूपों में अन्तर होता है।


आम > आम्


कल > कल्


प्यार >


पुल


>


प्यार्


पुल्


सच अधिक > सच्


अधिकृ


इस नियम को हम इस प्रकार लिखकर दिखा सकते हैं-


अ शून्य / शब्दान्त


(4) शब्द मध्य में अ-लोप-


शब्द के मध्य में उस 'अ' का लोप हो जाता है (उच्चारण नहीं किया जाता ) जिसके पहले एक स्वर तथा व्यंजन हो और उसके बाद एक व्यंजन तथा कोई दीर्घ स्वर हो। उदाहरण के लिए 'खुरपी' शब्द की रचना 'ख्+उ+र्+अ+प्+ई' ध्वनियों के मेल से हुई है। आप देख सकते हैं कि इस शब्द के मध्य में 'आने वाले 'अ' स्वर के पहले एक स्वर तथा व्यंजन (उ+र) आ रहे हैं तथा 'अ' के बाद एक व्यंजन और दीर्घ स्वर (प्+ई) आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में इस 'अ' का उच्चारण नहीं होता ।

वास्तव में हिन्दी 'भाषाभाषी 'खुरपी' शब्द का उच्चारण 'खुर्पी' के रूप में करते हैं। इस नियम को इस प्रकार लिखकर दिखा सकते हैं. -


अशून्य / स्वर + व्यंजन- - व्यंजन + दीर्घ स्वर


देखिए शब्द के मध्य में होने वाले अ-लोप के अन्य उदाहरण-


लकड़ी > लकड़ी


कुरसी कुर्सी


धरती >


धर्ती


गरमी> गर्मी


फिसला >


फिस्ला


चमचा > चम्चा


(5) शब्दान्त में ह्रस्व स्वरों का दीर्घीकरण-


हिन्दी में तीन ह्रस्व स्वर हैं अ, इ तथा उ। इनमें से शब्दान्त में आने वाले 'अ-स्वर' का तो लोप हो जाता है। जहाँ तक बात 'इ / उ' स्वरों की है, मातृभाषाभाषी शब्दान्त में इनका उच्चारण हस्व स्वरों के रूप में न कर दीर्घ स्वरों के रूप में करता है। उदाहरण के लिए 'पति' और 'मधु' शब्दों का


उच्चारण 'पती' तथा 'मधू' के रूप में किया जाता है। इस नियम को इस प्रकार लिखकर बता सकते हैं- इ | उ → --- शब्दान्त


ई/ ऊ/


देखिए कुछ और उदाहरण-


>


गति


जाति >


कपि


गती


जाती


कपी >


साधु


>


कटु


> कटू


साधू


वधू


वधु