सौन्दर्यशास्त्रीय आलोचना - Aesthetic criticism

सौन्दर्य को प्रतिमान मानकर साहित्य का मूल्यांकन करने वाली आलोचना प्रवृत्ति को सौन्दर्यशास्त्रीय आलोचना कहा जाता है। सौन्दर्य के स्वरूप और अर्थ के सम्बन्ध में विद्वानों में पर्याप्त मतभेद रहा है। सौन्दर्यशास्त्र का सम्बन्ध सौन्दर्य के तात्त्विक गुणों के विवेचन से है। साहित्य में सौन्दर्य की अभिव्यक्ति शब्द, लय, संगीत आदि के माध्यम से होती है। कुछ विद्वान सौन्दर्यशास्त्र को एन्द्रिय संवेदना का विज्ञान मानते हैं। सौन्दर्यशास्त्र को इसके सीमित अर्थ में सौन्दर्य के सिद्धान्त के रूप में और व्यापक अर्थ में कला के दर्शन के रूप में परिभाषित किया जाता है।