अन्विति : तात्पर्य एवं तत्सम्बन्धी नियम - Anviti: meaning and rules related to it
'अन्विति' से तात्पर्य है दो पदों के बीच तारतम्य (Concordence) वाक्य में अन्विति की स्थिति विशेषण और विशेष्य के मध्य तथा वाक्य की संज्ञाओं एवं क्रिया के बीच दिखाई देती है। इसका तात्पर्य यह है कि हिन्दी में कुछ विशेषण अपने विशेष्य के लिंग / वचन के अनुसार बदलते हैं तथा हिन्दी के वाक्यों में 'क्रिया' वाक्य की अलग-अलग संज्ञाओं के लिंग / वचन के अनुरूप अन्वित होती या प्रयुक्त होती है। इसीलिए 'अन्विति' को 'प्रयोग' भी कहते हैं। हिन्दी में विभिन्न स्तरों पर 'अन्विति' या 'प्रयोग' की क्या स्थिति है इसका ज्ञान अन्विति सम्बन्धी नियमों की जानकारी के बाद ही होता है। हम आगे इन नियमों की चर्चा करेंगे।
;अन्विति सम्बन्धी नियम-
(1) विशेषण- विशेष्य अन्विति
हिन्दी में प्रायः आकारान्त (आ-अन्त वाले) विशेषण अपने विशेष्य के लिंग और वचन के अनुसार अन्वित होते हैं, जैसे पके फल, मीठी चाय, खट्टा अमरूद, जली रोटी, काली बिल्ली, छोटा बच्चा, छोटी बच्ची, हरा वृक्ष, हरी घास आदि ।
यदि विशेष्य के स्थान पर एक से अधिक संज्ञाएँ हैं तो विशेष्य निकटवर्ती विशेष्य के अनुसार अन्वित
होता है, जैसे - छोटे बच्चे और बच्चियाँ, कच्ची इमली और आम, पुराना मकान और दुकान, छोटी लड़की और
लड़के आदि ।
;(2) कर्त्ता-क्रिया अन्विति
वाक्य में आने वाली संज्ञाओं में से किस संज्ञा के लिंग / वचन के अनुसार क्रिया अन्वित होगी इसके हिन्दी में तीन नियम इस प्रकार हैं-
नियम - 1: यदि कर्त्ता के स्थान पर आने वाली संज्ञा के बाद कोई परसर्ग नहीं लगा है (संज्ञा परसर्ग रहित है) तो
वाक्य की क्रिया सदैव कर्त्ता की संज्ञा के लिंग / वचन के अनुसार प्रयुक्त होगी, जैसे-
(i) लड़का रोज़ दौड़ता है।
;(ii) लड़के रोज़ दौड़ते हैं। (iii) लड़की रोज़ दौड़ती है।
(iv) लड़कियाँ रोज़ दौड़ती हैं।
(v) घोड़ा घास खाता है।
(vi) घोड़े घास खाते हैं।
(vii) घोड़ी घास खाती है।
(viii) घोड़ियाँ घास खाती हैं।
;नियम - 2: यदि कर्ता की संज्ञा के बाद कोई भी परसर्ग आ जाता है तो क्रिया उससे अन्वित न हो कर दूसरी
(कर्म की) संज्ञा के अनुसार बदलती है जैसे -
0 लड़के / लड़की ने दूध पिया ।
(ii) लड़के / लड़की ने चाय पी ।
(iii) माँ ने नाश्ता बनाया।
(iv) माँ ने मिठाई बनाई ।
;नियम - 3 : यदि कर्ता और कर्म दोनों परसर्ग सहित हैं तो क्रिया उन दोनों से अन्वित न होकर पुल्लिंग, एकवचन अन्यपुरुष के भूतकालिक रूप में आती है; जैसे-
(i) लड़कों / लड़कियों ने रोटी / रोटियों / आम / आमों को खाया।
(ii) माँ / पिताजी ने नौकरों / नौकरानियों को डाँटा ।
नियम - 4 : कर्त्ता में यदि समान लिंग वाली विभिन्न संज्ञाएँ 'और' से जुड़ी हों तो क्रिया बहुवचन में आती है,
जैसे-
(1) मोहन, सोहन और दीपक आगरा गए हैं।
;(ii) सुनीता, मीरा और मधु बाज़ार जा रही हैं।
नियम - 5: यदि कर्त्ता में संज्ञाएँ 'या' से जुड़ी हैं तो क्रिया अन्तिम संज्ञा के लिंग/ वचन के अनुसार बदलती है;
जैसे-
(1) मोहन, सोहन या मीरा आएगी।
(ii) गीता, मीरा या मदन आएगा।
नियम - 6 : कर्त्ता की विभिन्न लिंग वाली संज्ञाएँ यदि 'और' से जुड़ी हैं तो क्रिया सदैव पुल्लिंग बहुवचन में आएगी, जैसे-
;(i) सभी लड़के, लड़कियाँ, छात्र, छात्राएँ कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
(ii) मैं, वह, तुम और मेरे दोस्त पिकनिक पर चलेंगे।
नियम 7: यदि कर्ता का लिंग ज्ञात न हो तो क्रिया पुल्लिंगरूप लेगी, जैसे-
(i) कमरे के बाहर कौन खड़ा है ?
(ii) वहाँ कौन मिलेगा ?
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