कारक, विभक्ति तथा परसर्ग - causative, inflection and preposition
कारक के विषय में आपको बताया जा चुका है कि 'कारक' वाक्य की संज्ञाओं और क्रिया के बीच का सम्बन्ध है। इस सम्बन्ध को हर भाषा अपने-अपने ढंग से व्यक्त करती है। संस्कृत में इस सम्बन्ध को व्यक्त करने के लिए संज्ञा / सर्वनामों में कुछ 'रूपसाधक प्रत्यय' (Inflexional Suffixes ) जोड़े जाते थे। इन्हीं प्रत्ययों को ‘विभक्ति' कहा जाता था । संस्कृत में प्रत्येक कारक के लिए तीनों वचनों में विभक्ति चिह्न (प्रत्यय) निर्धारित थे ।
जहाँ तक हिन्दी का प्रश्न है, हिन्दी में इन विभक्ति सूचक प्रत्ययों की जगह 'ने', 'से', 'को' आदि 'कारकीय चिह्नों' या 'परसगी' ने ले ली और इन्हीं परसगों के माध्यम से संज्ञाओं का क्रिया के साथ सम्बन्ध व्यक्त किया जाने लगा।
;हिन्दी में दो तरह के कारकीय चिह्न मिलते हैं (i) विश्लिष्ट और (ii) संश्लिष्ट संज्ञाओं के साथ आनेवाले कारकीय चिह्न विश्लिष्ट होते हैं अर्थात् जो संज्ञा शब्द से अलग रहते हैं, जैसे- बच्चे ने लड़की को, छत पर, चम्मच से, अध्यापक के लिए आदि। जहाँ तक सर्वनामों का सम्बन्ध है, सर्वनामों के साथ कारकीय चिह्न संश्लिष्ट या मिले रहते हैं, जैसे- मुझे, तुम्हें, मेरा, तेरा, उसका, इसमें, तुम्हें तुम्हारा, उन्हें, हमारा आदि। यहाँ यह ध्यान रखना चाहिए कि 'मुझे तुझे' आदि रूप मुझको / तुझको से विकसित रूप हैं जिनमें कारकीय चिह्न संश्लिष्ट है। जहाँ तक 'के लिए'- जैसे दो पदों से बनने वाले कराकीय चिह्नों का प्रश्न है इनमें पहला पद संश्लिष्ट होता है और दूसरा विश्लिष्ट जैसे मैं+रे लिए मेरे लिए तुम + रे लिए तुम्हारे लिए तू + रे लिए तेरे लिए आदि
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