उपवाक्य : भेद-प्रभेद - Clause: Discrimination
जटिल वाक्यों आए सभी उपवाक्य एक जैसे नहीं होते। आपको ऊपर बताया गया था कि प्रायः 'जटिल वाक्य' दो तरह के होते हैं 'संयुक्त वाक्य' और 'मिश्र वाक्य' । उपवाक्यों के भेद भी इन्हीं को ध्यान में रखकर - किए जाते हैं। यह देखा जाता है कि उपवाक्य किसी संयुक्त वाक्य के अन्तर्गत आ रहे हैं या मिश्र वाक्यों के। संयुक्त वाक्यों के अन्तर्गत आने वाले उपवाक्यों की प्रकृति मिश्र वाक्यों में आने वाले उपवाक्यों की प्रकृति से भिन्न होती है। संयुक्त वाक्यों के अन्तर्गत आने वाले उपवाक्य 'समानाधिकृत उपवाक्य' कहलाते हैं तथा मिश्र वाक्यों के अन्तर्गत दो तरह के उपवाक्य आते हैं- 'प्रधान उपवाक्य' तथा 'आश्रित उपवाक्य' ।
;(1) समानाधिकृत उपवाक्य
'समानाधिकृत' शब्द का अर्थ है 'समान अधिकार है जिनका' अर्थात् वे उपवाक्य जिनका अधिकार - समान है अर्थात् जो समान स्तर के हैं। उनमें कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। इन्हें संयुक्त वाक्य से बाहर निकाल कर अलग से स्वतन्त्र रूप में बोला जा सकता है। देखिए निम्नलिखित संयुक्त वाक्यों में आए समानाधिकृत उपवाक्य -
(i) माँ मन्दिर गई हैं और पिताजी दफ्तर गए हैं।
(ii) तुम मेरे साथ चलोगी या यहीं रुकोगी।
;(iii) वह मेहनती तो बहुत है पर किसी की बात नहीं मानता।
(iv) तेज बारिश थी अतः मैं न आ सका।
(2) प्रधान तथा आश्रित उपवाक्य
आपको बताया गया था कि मिश्र वाक्यों में एक प्रधान उपवाक्य होता है तथा शेष उस पर आश्रित उपवाक्य होते हैं। जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य पर आश्रित रहते हैं वे ही 'आश्रित उपवाक्य' कहलाते हैं, देखिए मिश्र वाक्यों में आने वाले प्रधान और आश्रित उपवाक्य-
प्रधान उपवाक्य को तो मिश्र वाक्य से बाहर निकालकर स्वतन्त्र रूप से बोला जा सकता है लेकिन आश्रित उपवाक्यों को स्वतन्त्र रूप से नहीं बोला जा सकता।
;आश्रित उपवाक्य भेद-प्रभेद
मिश्र वाक्यों में तीन तरह के 'आश्रित उपवाक्य' आ सकते हैं संज्ञा उपवाक्य, विशेषण उपवाक्य तथा -
क्रियाविशेषण उपवाक्य ।
(1) संज्ञा उपवाक्य
संज्ञा उपवाक्य वे उपवाक्य हैं जो वाक्य में 'संज्ञा पद' या 'संज्ञा पदबंध के स्थान पर आ सकते हैं और वही प्रकार्य करते हैं जो प्रकार्य 'संज्ञा पद पदबंध द्वारा किया जाता है। संज्ञा उपवाक्य की पहचान के लिए वाक्य की क्रिया पर 'क्या' शब्द से प्रश्न करना चाहिए।
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'क्या' के उत्तर में जो उपवाक्य मिलता है वही 'संज्ञा उपवाक्य'' होता है'। इसके अलावा 'संज्ञा उपवाक्य' प्रायः 'कि' अव्यय से जुड़े रहते हैं; जैसे पिताजी ने कहा कि कल से - वे नौकरी पर नहीं जाएँगे। इस वाक्य की क्रिया पर यदि 'क्या' शब्द से प्रश्न किया जाए कि 'पिताजी ने क्या कहा?' तो उत्तर होगा 'कल से वे नौकरी पर नहीं जाएँगे।' साथ ही यह उपवाक्य 'कि' समुच्चयबोधक अव्यय से भी जुड़ा है अतः 'संज्ञा उपवाक्य' है।
(2) विशेषण उपवाक्य
'विशेषण उपवाक्य' वे उपवाक्य हैं जो 'संज्ञा पद' की विशेषता वैसे ही बताते हैं जैसे कोई 'विशेषण पद'
या 'विशेषण पदबंध बताता है। विशेषण उपवाक्य की पहचान के लिए 'प्रधान उपवाक्य' के कर्त्ता पर 'कौनसा / कौनसी' शब्दों से प्रश्न कीजिए। उत्तर में मिलने वाले उपवाक्य 'विशेषण उपवाक्य' होंगे।
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इसके अतिरिक्त 'विशेषण उपवाक्य' प्रायः 'जो / जिस' आदि अव्ययों से जुड़े रहते हैं, जैसे- 'जो लड़की काम कर रही थी वह बहुत ईमानदार है' वाक्य के प्रधान उपवाक्य पर यदि 'कौनसी' शब्द से प्रश्न करें कि 'कौनसी लड़की ईमानदार है? तो उत्तर में मिलने वाला उपवाक्य 'जो लड़की काम कर रही थी' 'विशेषण उपवाक्य' होगा। इसके अलावा यह 'जो' परसर्ग से भी जुड़ा हुआ है।
(3) क्रियाविशेषण उपवाक्य
'क्रियाविशेषण उपवाक्य' वाक्य में 'क्रियाविशेषण पद' या 'क्रियाविशेषण पदबंध के स्थान पर आते हैं। और जिस तरह क्रियाविशेषण पद / पदबंध वाक्य की क्रिया की विशेषता बताते हैं उसी तरह ये भी क्रिया की विशेषता बताते हैं।
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जिस तरह क्रियाविशेषण क्रिया के घटित होने के 'समय', 'स्थान' रीति' और 'परिमाण' सम्बन्धी विशेषताएँ बताते हैं उसी तरह 'क्रियाविशेषण उपवाक्य' भी क्रिया की इन्हीं विशेषताओं को बताने का प्रकार्य करते हैं। इन्हीं प्रकार्यों के कारण 'क्रियाविशेषण उपवाक्यों' के निम्नलिखित भेद हो जाते हैं-
(क) स्थानवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य-
यदि वाक्य की क्रिया पर 'कहाँ' प्रश्नवाचक शब्द से प्रश्न किया जाए तो उत्तर में जो उपवाक्य मिलते हैं वे 'क्रियाविशेषण उपवाक्य' होते हैं, जैसे-
(0) जहाँ तुम जाओगे मैं भी वहीं आऊँगा ।
;(प्रश्न कहाँ जाओगे ? उत्तर - जहाँ तुम जाओगे) वह वहाँ गया है जहाँ हर कोई नहीं जाता। ( प्रश्न कहाँ गया है ? उत्तर - जहाँ हर कोई नहीं जाता ) -
(ख) कालवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य-
इनका पता क्रिया पर 'कब' के उत्तर में मिलता है, जैसे-
(1) जब तुम खाओगी तब वे भी खाएँगे। (प्रश्न- - वे कब खाएँगे ? उत्तर - जब तुम खाओगी) (ii) वे तब एयरपोर्ट पहुँचे जब विमान छूट चुका था। ( प्रश्न कब पहुँचे ? उत्तर- जब विमान छूट चुका था )
;(ग) रीतिवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य -
क्रिया पर जब 'कैसे' प्रश्नवाचक शब्द से प्रश्न किया जाता है तब 'रीतिवाचक क्रियाविशेषण उपवाक्य'
प्राप्त होते है, जैसे-
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(0) (ii) वह ऐसे चल रहा था जैसे कोई बीमार चलता हो। ( प्रश्न कैसे चल रहा था ? उत्तर- जैसे बीमार चलता हो) - वह इस तरह बोल रहा था जैसे कोई नेता हो।
(प्रश्न- कैसे बोल रहा था ? उत्तर - जैसे कोई नेता हो)
;(घ) परिमाणवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य -
इन उपवाक्यों का पता क्रिया पर 'कितना' प्रश्नवाचक शब्द के उत्तर में मिलता है, जैसे-
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(1) मैंने इतना खाया जितना कोई नहीं खा सकता।
(प्रश्न कितना खाया ? उत्तर जितना कोई नहीं खा सकता) - - (ii) जितना सामान बेच सकता था, उसने बेच दिया। ( प्रश्न कितना बेच दिया ? उतर जितना बेच सकता था) -
अतः 'क्रियाविशेषण उपवाक्यों' की पहचान के लिए प्रधान उपवाक्य की क्रिया पर 'कब', 'कहाँ', 'कैसे' और 'कितना / कितने' शब्दों से प्रश्न करने चाहिए। इन प्रश्नों के उत्तर में मिलने वाले आश्रित उपवाक्य 'क्रियाविशेषण उपवाक्य' कहलाते हैं।
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