हिन्दी शब्द की अवधारणात्मक व्याख्या - Conceptual explanation of Hindi word
वर्तमान सन्दर्भों में 'हिन्दी' पदबंध अपने अवधारणामूलक अर्थ को काफी व्यापकता से ग्रहण किए हुए है। इसे भाषाविज्ञान में प्रयुक्त 'प्रयोजनमूलक भाषा रूप' के तकनीकी अर्थों (Specific features) के सन्दर्भों को लेकर हमें, विशेष परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है, यथा- भारत में, हिन्दी की प्रकार्यात्मक अवधारणा (Functional Concept) कई कार्य क्षेत्रों पर टिकी हुई है। मसलन जहाँ, हमारे (भारत के) सांवैधानिक प्रावधानों (भाग-17) के अनुसार, अलग-अलग सन्दर्भों में हिन्दी, राजभाषा (Official Language) एवं सामासिक- संस्कृति की सम्पर्क भाषा है;
वहीं, साहित्यिक अभिव्यक्ति की एक प्रमुख भाषा होने के साथ-साथ विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों (मनोरंजन (रेडियो, सिनेमा, टी.वी.), खेलजगत्, बैंकिंग-बीमा, पर्यटन, चिकित्सा, आर्थिक, धार्मिक आदि } में, मौखिक एवं लिखित व्यावहारिक रूपों में प्रयुक्त हो रही है। हिन्दी के यही व्यावहारिक प्रयुक्त भाषिक रूप, कार्य प्रकृति की अवधारणा से जुड़े हुए हैं। इस प्रकार नाना व्यावहारिक क्षेत्रों में प्रयुक्त हिन्दी का अवधारणात्मक रूप उसके मंतव्य / आशयिक प्रकार्य से जुड़ा हुआ है, जिसका अध्ययन-क्षेत्र बहुत व्यापक है। इस पर आगे के मुद्दों में चर्चा होगी।
हम यह जानते हैं, किसी भी विकसित भाषा के सम्प्रेषण के लिए लिपि का बहुत बड़ा महत्त्व होता है। बहरहाल आइए, इसी दिशा में हिन्दी की लिपि पर चर्चा हो जाए।
हिन्दी की लिपि
(क) हिन्दी भाषा और देवनागरी लिपि हम जानते हैं किसी बोली के लिए (अपनी) लिपि का होना जरूरी नहीं है, परन्तु किसी विकसित भाषा के लिए अपनी लिपि का होना आवश्यक है। चूँकि, हिन्दी एक विकसित भाषा है, अतः देवनागरी के रूप में उसकी अपनी एक लिपि है। 21वीं सदी की हिन्दी, निश्चित रूप से 14वीं सदी की हिन्दी के रूप से विकसित होकर, अब आवश्यकतानुसार अपना एक परिवर्धित (Enlarged/Additional) - परिवर्तित लिखित (लैपिक / Scripted) रूप ले चुकी है। जिसे,
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 (1) में, निर्दिष्ट देवनागरी लिपि के प्रयोग के साथ राजभाषा के रूप में अधिकृत किया गया है। साथ ही संविधान के 351 अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी को भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्त्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम भी माना गया है।
आप इस तथ्य से अवगत होंगे कि देवनागरी, प्राचीन ब्राह्मी लिपि की वंशज है। और, ब्राह्मी लिपि की वर्णमाला, तत्कालीन भारत की राष्ट्रीय- वर्णमाला के रूप स्थापित थी।
इसी से, सातवीं शताब्दी में नागरी लिपि प्रस्फुटित होकर दसवीं सदी आते-आते अपनी परिपक्व अवस्था को प्राप्त हुई और उत्तर भारत की कई भाषाओं / बोलियों की लिपि बनी। (सन्दर्भ देवनागरी विकास, परिवर्धन और मानकीकरण, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार, 1974, पृ. 7-9 ) सम्भवतः यही कारण है कि आज भी देवनागरी को राष्ट्रलिपि बनाने की पैरवी की जाती है। (सन्दर्भ : "चेतना का आत्मसंघर्ष- "हिन्दी की 21वीं सदी", लेख : 'देवनागरी बन सकती है राष्ट्रलिपि, लेखक : डॉ. रामरंजन परिमलेंदु', सं. कन्हैयालाल नन्दनः प्रकाशक : भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, नयी दिल्ली, 2007, पृ. 161- 168)।
अपनी अक्षरात्मक एवं आज के सन्दर्भों में अपनी अर्जित ध्वन्यात्मक परिवर्धित और मानकीकृत लिपि चिह्नों की विशेषताओं के कारण यह लिपि 21वीं सदी में पूर्ण रूप से वैज्ञानिक लिपि बनकर स्थापित हुई है।
(ख) वर्तमान सन्दर्भ और देवनागरी 21वीं सदी में विकसित-कंप्यूटर / स्मार्ट-फोन आदि के अटलनीय प्रयोग से, हिन्दी को भी अपेक्षित आवश्यकतानुसार तैयार करने के लिए इसकी देवनागरी लिपि में भी परिवर्धन / परिवर्तन करने की सामयिक आवश्यकता आन पड़ी। अतः इसी परिप्रेक्ष्य में, भाषा विशेषज्ञों के पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद, भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा, 1980 में, देवनागरी लिपि का परिवर्धन / परिवर्तन रूप स्वीकृत किया गया।
जिसे 1983 में, 'देवनागरी लिपि तथा हिन्दी वर्तनी का मानकीकरण' नामक शीर्षक से प्रकाशित किया गया। साथ ही, विकसित-कंप्यूटर/ स्मार्ट- फोन आदि के अटलनीय प्रयोग को लेकर हिन्दी को भी अपेक्षित आवश्यकतानुसार तैयार करने के लिए, इसे मानक देवनागरी लिपि के प्रयोग के लिए यूनिकोड जैसी तकनीक से जोड़ा गया है। इसमें, यूनिकोड (Unicode), प्रत्येक अक्षर के लिए एक विशेष संख्या प्रदान करता है। चाहे कोई भी कम्प्यूटर प्लेटफॉर्म / प्रोग्राम अथवा कोई भी भाषा हो उसे मंगल-फॉण्ट को लेकर हिन्दी (देवनागरी लिपि) के लिए,
एक ओपनटाइप यूनिकोड फॉण्ट, (जो कि विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम का डिफॉल्ट हिन्दी फॉण्ट है जिसे यूजर इंटरफेस फॉण्ट के तौर पर डिजाइन किया गया है) के रूप में तैयार किया गया है। इसे, विंडोज़ ऍक्सपी तथा इसके उत्तरोत्तर संस्करणों (विंडोज़ विस्ता, विंडोज़ - 7 आदि) में, इण्डिक टैक्स्ट, जो रोमन लिपि के आधार पर देवनागरी एवं रोमन लिपि के वैकल्पिक समर्थन हेतु उपलब्ध करवाया गया है। यह, देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली सभी भाषाओं जैसे, हिन्दी, मराठी, नेपाली तथा संस्कृत हेतु विडोज़ का डिफॉल्ट फ़ॉण्ट है।
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