समुच्चयबोधक - conjunction
कुछ अविकारी शब्द दो पदों, दो पदबंधों या दो वाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे अव्ययों को ही व्याकरण में 'योजक' या 'समुच्चयबोधक' अव्यय कहते हैं। समुच्चयबोधक अव्यय केवल जोड़ने का ही कार्य नहीं करते, जोड़ने के अलावा ये और भी कार्य करते हैं, जैसे-
(1) जोड़ने का कार्य -
और, तथा, एवं
(i) मोहन और सोहन दोनों जाएँगे ।
(ii) मैं चलूंगा और तुम भी चलोगे।
;(2) विरोध दिखाने का कार्य-
लेकिन, मगर, किन्तु, परन्तु
(1) वह आना चाहती थी लेकिन / मगर न आ पाई।
(ii) मैं चलूँगा किन्तु / परन्तु आपको भी आना होगा।
(3) कारण / परिणाम बताने का कार्य-
अतः, इसलिए, क्योंकि, ताकि
;(1) मेहनत नहीं की अतः / इसलिए फेल हो गया।
(ii) मुझे कुछ रुपये चाहिए ताकि कर्ज़ चूका सकूँ।
(4) विकल्प बताने का कार्य-
या, अथवा, चाहे, अन्यथा
(i) आप चाय लेंगे या कॉफ़ी ?
(ii) किराया दो अथवा मकान खाली कर दो।
;समुच्चयबोधक अव्ययों के भेद-
समुच्चयबोधक अव्ययों के दो भेद किये जाते हैं समानाधिकर समुच्चयबोधक तथा व्याधिकरण
समुच्चयबोधक |
(1) समानाधिकरण समुच्चयबोधक-
वे योजक शब्द जो समान स्तर वाले अंशों को जोड़ते हैं, जैसे-
(1) जोड़ने का कार्य -
और, तथा, एवं
() राम और भरत भाई-भाई थे।
;(ii) तुम भी आना तथा अपनी बहन को भी लाना ।
(2) विरोध प्रदर्शन-
(1)
दौड़ो मगर ध्यान से।
लेकिन, मगर, किन्तु, परन्तु, पर, बल्कि
(ii) वह काम तो करता है मगर / पर गलतियाँ बहुत करता है।
(3) विकल्प-
या, अथवा, या या, नहीं तो, अन्यथा, वरना
(1) देर तक पढ़ो वरना / अन्यथा पास नहीं हो पाओगे।
;(ii) सामान वापस करो या जेल जाओ।
(4) परिणाम प्रदर्शन -
इसलिए, अतः, फलतः, नहीं तो, अन्यथा
(i) परिश्रम नहीं किया अतः पास न हो सका।
(ii) ब्लैक मनी था इसलिए लुटा रहा है।
(2) व्याधिकरण समुच्चयबोधक-
वे योजक जिनमें एक अंश मुख्य होता है और दूसरा गौण या जो मिश्र वाक्यों के आश्रित उपवाक्यों को प्रधान उपवाक्यों से जोड़ने का काम करते हैं,
;
'व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं। इनके भेद इस प्रकार हैं-
(1) हेतुबोधक -
क्योंकि, चूँकि, इसलिए, इस कारण
(1) बारिश तेज़ थी इसलिए न आ सका।
(ii)
चूँकि आज बहुत भीड़ है हम लोग कल चलेंगे।
(2) संकेतबोधक-
;यद्यपि ... तथापि / तो भी, यदि... तो, चाहे ... तो
(1) यदि तुम चाहो तो मैं यह चल सकता हूँ।
(ii) यद्यपि वह बीमार है तो भी इतना काम करती है।
(3) स्वरूपबोधक-
अर्थात् मानों, यानी, यहाँ तक
01) नोट बंदी यानी बेईमानों का खात्मा ।
(ii) ऐसा लगा मानों धरती हिल गई हो।
(4) उद्देश्यबोधक-
ताकि, जिससे, कि
(1) मेहनत करो जिससे पास हो सको
(ii) दिन-रात एक कर दो ताकि कक्षा में प्रथम आ सको।
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