भाषा की परिभाषा - definition of language
अब प्रश्न यह है कि भाषा का लक्षण क्या है? भाषा की परिभाषा क्या हो सकती है ? अथवा भाषा किसे कहते हैं ? भाषा का लक्षण भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वानों ने विविध ढंग से प्रस्तुत किया है। भारत के सुप्रसिद्ध वैयाकरण महर्षि पतंजलि ने अपने महाभाष्य में भाषा का लक्षण करते हुए लिखा है- "जो वाणी वर्णों में व्यक्त करती है। उसे भाषा कहते हैं।" सुप्रसिद्ध वैयाकरण कामता प्रसाद गुरु ने लिखा है कि "भाषा वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों पर भली-भाँति प्रकट कर सकता है और दूसरों के विचार आप स्पष्टतया समझ सकता है ।"
डॉ. श्यामसुन्दरदास ने लिखा है "मनुष्य और मनुष्य के बीच वस्तुओं के विषय में अपनी इच्छा और गति का आदान-प्रदान करने के लिए व्यक्त ध्वनि संकेतों का जो व्यवहार होता है उसे भाषा कहते हैं।" डॉ० बाबूराम सक्सेना का विचार है कि "जिन ध्वनि चिह्नों द्वारा मनुष्य परस्पर विचार-विनियम करता है, उनको समष्टि रूप से भाषा कहते है।" डॉ. भोलानाथ तिवारी का मत है "भाषा निश्चित प्रयत्न के फलस्वरूप मनुष्य के से मुख निस्सृत व सार्थक ध्वनि समष्टि है, जिसका विश्लेषण और अध्ययन हो सके।" आचार्य देवन्द्रनाथ शर्मा का विचार है कि "पूर्ण अभिव्यक्ति भाषा है अथवा जिसकी सहायता से मनुष्य परस्पर विचार-विनिमय या सहयोग करते हैं, उस यादृच्छिक रूढ ध्वनि संकेत की प्रणाली को भाषा कहते हैं। "
पाश्चात्य विद्वानों ने भी भाषा की विविध रूपों में व्याख्या की है। सुप्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक मैक्समूलर ने भाषा की परिभाषा करते हुए लिखा है कि "भाषा और कुछ नहीं है, केवल मानव की चतुर बुद्धि द्वारा आविष्कृत एक ऐसा उपाय है जिसकी मदद से हम अपने विचार सरलता और तत्परता से दूसरों पर प्रकट कर सकते हैं और जो चाहते हैं कि इसकी व्याख्या प्रकृति की उपज के रूप में नहीं, बल्कि मनुष्य-कृत पदार्थ के रूप में करना उचित है।"
इटली के सुप्रसिद्ध साहित्य-शास्त्री क्रोचे का मत है "भाषा उस स्पष्ट सीमित तथा सुसंगठित ध्वनि को कहते है, जो अभिव्यंजना के लिये नियुक्त की जाती है।" हेनरी स्वीट का विचार हैं- "जिन व्यक्त ध्वनियों द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति होती है उन्हें भाषा कहते है।" ए.एच. गार्डिनर का कथन है- "विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जिन व्यक्त एवं स्पष्ट ध्वनि संकेतों का व्यवहार किया जाता है, उन्हें भाषा कहते हैं।" ऐसे ही ब्रिटेन के विश्वकोष में भाषा की परिभाषा इस प्रकार की गयी है "भाषा व्यक्त ध्वनि चिह्नों की उस पद्धति को कहते हैं
जिसके माध्यम से प्रत्येक समाज के दल एवं संस्कृति के मामने वाले सदस्य पारस्परिक विचार-विनिमय किया करते हैं। "
अतः भाषा की सर्वमान्य परिभाषा यह हो सकती है कि "भाषा मुख से उच्चरित इस परम्परागत, सार्थक एवं व्यक्त ध्वनि संकेतों की समष्टि को कहते हैं, जिसकी सहायता से मानव आपस में विचारों एवं भावों का आदान-प्रदान करते हैं तथा जिसका वे स्वेच्छानुसार अपने दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं।"
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