वाक्य की परिभाषा - definition of sentence
उद्देश्य तथा विधेय से बनी भाषा की वह लघुतम इकाई जिसके माध्यम से वक्ता अपने भावों और विचारों को श्रोता तक सम्प्रेषित करता है 'वाक्य' कहलाता है।
पूर्णांग तथा अल्पांग वाक्य
जैसा ऊपर स्पष्ट किया गया वाक्य की रचना के लिए उद्देश्य तथा विधेय का होना अति आवश्यक है।
आप देख सकते हैं कि क खण्ड के वार्तालाप में यद्यपि एक पद वाली रचनाएँ हैं लेकिन भाव या विचार - को प्रकट करने की दृष्टि से वे पूर्ण हैं। वास्तव में हम जानते हैं कि ये खण्ड ख में आए वाक्यों के लघु रूप हैं ।
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- अतः यह कहा जा सकता है कि भाषा में कुछ वाक्य ऐसे भी हो सकते हैं जिनके कुछ अंशों का लोप कर दिया गया। हो,
परन्तु ये अर्थ या भाव को सन्दर्भ के अनुसार स्पष्ट करने में समर्थ होते हैं। ऐसे वाक्यों को 'लघु वाक्य' या 'अल्पांग वाक्य' (अल्प या कम हैं अंग जिसके) कहा जाता है। इस दृष्टि से वाक्य दो तरह के हो जाते हैं-
(क) पूर्णांग वाक्य -
वे वाक्य जिनके सभी अंग वाक्य में विद्यमान हों।
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पूर्णांग वाक्यों में 'उद्देश्य' तथा 'विधेय' सम्बन्धी सभी घटक वाक्य में विद्यमान रहते हैं। जैसे 'मजदू पेड़ काट रहे हैं', 'मेरी छोटी बहन सिलाई की मशीन चला रही - है', 'झूठ बोलने वाला लड़का आपनी साइकिल से घर चला गया है।'
(ख) अल्पांग वाक्य.
जिन वाक्यों में उद्देश्य अथवा विधेय से सम्बन्धित घटकों में से कोई एक घटक विद्यमान हो, 'अल्पांग 'वाक्य' कहलाते हैं; जैसे आइए, उधर बैठिए, नमस्कार, क्यों ? आदि। -
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