संख्या तथा वचन में अन्तर - difference between number and word

 संख्या तथा वचन में अन्तर - difference between number and word


जिस तरह सेक्स और जेंडर (लिंग) समान नहीं हैं उसी तरह 'संख्या' और 'वचन' भी समान नहीं होते। भौतिक जगत् से सम्बन्ध होने के कारण 'संख्या' 'भौतिक सत्य' है तथा 'वचन' संख्या की भाषिक अभिव्यक्ति होने के कारण 'भाषिक सत्य' है। 'लिंग' की चर्चा करते समय यह बताया जा चुका है कि भौतिक सत्य और भाषिक सत्य हमेशा एक होंगे यह आवश्यक नहीं है। भौतिक सत्य और भाषिक सत्य समान होंगे या परस्पर भिन्न यह तो भाषाभाषी पर निर्भर करता है।

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वह कभी भाषा में दोनों को समान रूप में अभिव्यक्त करता है तो कभी अपनी कल्पना से दोनों में अन्तर कर देता है। 


उक्त तालिका से स्पष्ट है कि वाक्य 1 का 'लड़का' पद भौतिक जगत् में संख्या के स्तर पर भी एक एक - हैं तथा भाषिक जगत् में भी एक होने के कारण 'एकवचन' में है। वाक्य 2 का 'लड़के' पद भौतिक सत्य के स्तर - पर भी अनेक है तथा भाषिक सत्य के स्तर पर भी एकाधिक होने के कारण 'बहुवचन' में है।

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लेकिन वाक्य - 3 का 'पिताजी' पद भौतिक सत्य के स्तर पर तो एक है पर वाक्य में उसे बहुवचन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


इसका कारण स्पष्ट है कि हिन्दी में आदर/सम्मान देने के लिए कर्ता के बाद 'जी' लगाया जाता है और भाषा में उसे बहुवचन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अतः ध्यान रखिए जिस तरह सेक्स और लिंग एक नहीं हैं उसी तरह 'संख्या' और 'वचन' भी एक नहीं हैं।