सेक्स तथा लिंग में अन्तर - difference between sex and gender
प्रायः 'लिंग' के सम्बन्ध में यह आम धारणा है कि भौतिक जगत् में जिन संज्ञाओं का 'सेक्स' पुरुषवाची (Male) है, भाषा में आने पर वे 'पुल्लिंग शब्द' होंगे, जिनका 'सेक्स' स्त्रीवाची (Female) है वे भाषा में 'स्त्रीलिंग शब्द होंगे तथा जो निर्जीव वस्तुएँ हैं भाषा में उनको व्यक्त करने वाले शब्द 'नपुंसकलिंग वाची' होंगे। परन्तु ऐसा होना अनिवार्य नहीं है। यह भाषा की प्रकृति पर निर्भर करता है। यह भी कोई ज़रूरी नहीं है कि हर भाषा में 'लिंग' की संख्या समान हो। आप जानते ही हैं कि संस्कृत में तीन लिंग थे - पुल्लिंग, स्त्रीलिंग तथा नपुंसकलिंग' पर हिन्दी में दो ही रह गए पुल्लिंग तथा स्त्रीलिंग। उदाहरण के लिए संस्कृत में 'woman' के लिए तीन अलग-अलग शब्द मिलते हैं 'नारी', 'दारा' तथा 'कलत्रम्'।
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इनमें से 'नारी' स्त्रीलिंग शब्द है, 'दारा' पुल्लिंग शब्द है तथा 'कलत्रम्' नपुंसकलिंग शब्द है जबकि, 'सेक्स' के स्तर पर तीनों ही स्त्रीवाची (female) शब्द हैं। यह उदाहरण इस बात की ओर संकेत करता है कि भौतिक जगत् से सम्बन्ध रखने वाला 'सेक्स' तथा भाषिक जगत् से सम्बन्ध रखने वाला 'लिंग (gender) एक नहीं हैं।
इस बात को समझने के लिए पहले यह समझना होगा कि भाषा में जिसे 'लिंग' कहा जाता है वह है क्या ? वस्तुतः 'सेक्स' का सम्बन्ध भौतिक जगत् से है। भौतिक जगत् में विद्यमान प्रत्येक वस्तु की अपनी सत्ता (Physical Reality) होती है अतः भौतिक जगत् की वस्तुओं को हम 'भौतिक सत्य' (Physical Reality) कह सकते हैं।
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इसी 'भौतिक सत्य' को भाषाभाषी द्वारा भाषा में अभिव्यक्त किया जाता है। भौतिक सत्य के भाषा में अभिव्यक्त रूप को 'भाषिक सत्य' (Linguistic Reality) कह सकते हैं। इस तरह 'सेक्स' यदि भौतिक सत्य है तो 'लिंग' भाषिक सत्य ।
'भौतिक सत्य' को भाषा में 'भाषिक सत्य' के रूप में अभिव्यक्त करने का कार्य मनुष्य के द्वारा किया जाता है। मनुष्य के पास कल्पनाशक्ति होती है। कभी तो वह किसी भौतिक सत्य को भाषा में यथावत रूप में व्यक्त कर देता है और कभी अपनी कल्पना से उसकी भाषिक प्रस्तुति में अन्तर कर देता है।
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उदाहरण के लिए कभी तो भौतक जगत् की 'स्त्री' (woman) जो सेक्स के स्तर पर 'female' है को भाषा में स्त्री के रूप में ही व्यक्त करता है और हमें संस्कृत में 'नारी / स्त्री' जैसे स्त्रीलिंग शब्द प्राप्त होते हैं जिनके सेक्स और लिंग समान होते हैं। और दूसरी ओर कभी वह भौतिक जगत् की स्त्री को अपनी कल्पना से पुरुष बनाकर पुल्लिंग रूप में व्यक्त करता है। तो उसे संस्कृत में 'दारा' (पुल्लिंग शब्द) कहा जाता है या कभी उसे नपुंसक रूप में व्यक्त करता है तो उसे उसे 'कलत्रम्' कहा जाता है।
स्त्रीलिंग भौतिक सत्य एवं भाषिक सत्य समान पुल्लिंग भौतिक सत्य एवं भाषिक सत्य असमान नपुंसकलिंग भौतिक सत्य एवं भाषिक सत्य असमान
इस तरह संस्कृत में 'नारी', 'दारा' तथा 'कलत्रम्' तीनों ही शब्दों का भौतिक धरातल पर सेक्स तो समान है पर भाषिक सत्य के स्तर पर तीनों में अन्तर है। 'नारी स्त्रीलिंग शब्द है, 'दारा' पुल्लिंग तथा 'कलत्रम्' नपुंसकलिंग । अतः ध्यान रखिए 'सेक्स' और 'लिंग' समान नहीं होते।
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