अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद - difference of sentences on the basis of meaning

(1) कथनात्मक वाक्य


इस वर्ग में या तो सामान्य कथन आते हैं या किसी वस्तु या व्यक्ति की स्थिति / अवस्था की सूचना देने वाले वाक्य आते हैं, जैसे -


(1) बच्चे मैदान में दौड़ रहे हैं।


(ii) सभी अध्यापक कक्षा में पढ़ा रहे हैं।


(iii) वे दोनों सो चुके हैं।


ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुँच गई है। 


(v) वह आँखों की डॉक्टर है।

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(vi) सारी किताबें अलमारी में हैं।


(vii) लड़के खेल रहे हैं और लड़कियाँ दौड़ रही हैं। (viii) जो लड़का बीमार है उसका इलाज चल रहा है।


(2) आज्ञार्थक वाक्य


जिन वाक्यों में वक्ता किसी को आज्ञा, आदेश, अनुमति आदि देता है, 'आज्ञार्थक वाक्य' कहलाते हैं,


जैसे-


(1) आज तू यहीं सो जा


(ii) तुम अपना काम करो।

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(iii) आप मेरे साथ आइए।


(iv) शाम को जल्दी आ जाइएगा।


(v) शाम को सब्जी लेते आना।


(vi) उसे दवाई पिला दो ।


(vii) पहले खाना खाओ फिर जाकर सो जाओ।


(viii) अपना सामान उठाओ और यहाँ से निकल लो।

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(3) प्रश्नवाचक वाक्य


जिन वाक्यों में वक्ता द्वारा कोई प्रश्न पूछा जाता है, वे वाक्य 'प्रश्नवाचक वाक्य' कहलाते हैं। ये दो तरह के


होते हैं-


(क) 'हाँ / ना' उत्तर वाले प्रश्नवाचक वाक्य -


इन प्रश्नवाचक वाक्यों के प्रारम्भ में 'क्या' प्रश्नवाचक शब्द लगता है और इन प्रश्नों के उत्तर 'हाँ' या 'ना' में दिए जा सकते हैं,



(ख) अन्य प्रश्नवाचक वाक्य-


वे प्रश्नवाचक वाक्य जिनमें प्रश्नवाचक शब्द वाक्य के बीच में आते हैं, जैसे-

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(1) वह कहाँ रहती है ?


(ii) तुमको खाने में क्या पसंद है ?


(iii) तुम दोनों यहाँ से कैसे जाओगे ?


(iv) ताजमहल किसने बनवाया था ?


(v) घर के बाहर कौन खड़ा है ?


(vi) बीमार को दवा कब देनी है?

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(vii) अपने आज क्या-क्या खरीदा ?


(viii) तुम वहाँ से कब चले और यहाँ कब पहुँचे ?


(4) इच्छार्थक वाक्य


जिन वाक्यों में वक्ता अपनी किसी इच्छा को व्यक्त करता है, 'इच्छार्थक वाक्य' कहलाते हैं, जैसे-


(i) आपको नौकरी मिल जाए।


(ii) आप जल्दी स्वस्थ हो जाएँ।

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(iii) लौटरी निकल आए तो अच्छा हो।


(iv) बारिश आ जाए तो अच्छा है।


(v) ईश्वर आपको शक्ति दे।


(vi) नौकरी लग जाए, यही कामना है।


(5) सम्भावनार्थक वाक्य


इन वाक्यों में वक्ता कार्य के होने या न होने की सम्भावना प्रकट करता है, जैसे-

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(1) शायद ट्रेन देर से आए।


(ii) हो सकता है तुम्हारा काम बन जाए ?


हो सकता है भाईसाहब चल दिए हों।


(iv) यह दवाई दें, हो सकता है बुखार उतर जाए।



(6) निषेधात्मक या नकारात्मक वाक्य


इन वाक्यों में सामान्य कथनों को नकारा जाता है। हिन्दी में प्रायः 'नहीं', 'मत' तथा 'न' लगाकर

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निषेधात्मक वाक्य बनाए जाते हैं। कथनात्मक वाक्यों को 'नहीं' लगाकर निषेधात्मक बनाया जाता है, जैसे-


(क) कथानात्मक निषेधात्मक वाक्य -


(1) फिल्म नहीं दिखाई जाएगी। (ii) प्रधानमंत्री अमेरिका नहीं जा रहे।


(iii) किताब मेज़ पर नहीं है।


इसके अलावा 'आज्ञार्थक वाक्यों' को नकारात्मक वाक्यों में बदलने के लिए 'मत' तथा 'इच्छार्थक एवं 'सम्भावनार्थक' वाक्यों' को नकारात्मक वाक्यों में बदलने के लिए 'न' लगाया जाता है, जैसे-

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(ख) आज्ञार्थक निषेधात्मक वाक्य -


(1) मेरे सामने झूठ मत बोलो।


(ii) देर रात तक मत जागा करो। (iii) आप उसकी बात मत सुनिए।


(ग) इच्छार्थक निषेधात्मक वाक्य- -


(i) मैं चाहता हूँ कि आप कभी सफल न हों।

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(ii) तुम्हें कभी नौकरी न मिले।


(घ) सम्भावनार्थक निषेधात्मक वाक्य- -


(1) शायद ट्रेन समय पर न आए।


(ii) हो सकता है आज बारिश न हो ।


(7) विस्मयादिबोधक वाक्य


इन वाक्यों में विस्मय, आश्चर्य, घृणा, शोक, हर्ष, प्रेम आदि के भाव व्यक्त किए जाते हैं तथा वाक्य के


प्रारम्भ में विस्मयादिसूचक अव्ययों का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

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(i) वाह ! कितना बढ़िया भोजन बनाया है।


(ii) उफ़ ! कितनी तेज़ गरमी है।


(iii) हाय ! मैं क्या करूँ ?


(iv) छि ! कितनी गंदी जगह है।


(v) शाबाश! तुमने तो कमाल कर दिया।


(vi) अरे ! यह क्या कर रहे हो ?


(8) संकेतवाचक या शर्तवाची वाक्य-

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इन वाक्यों में किसी न किसी शर्त को पूरा करने का कार्य किया जाता है अतः इन वाक्यों को 'शर्तवाची वाक्य' भी कहते हैं। इन वाक्यों के उपवाक्य प्रायः 'यदि / अगर... तो' से जुड़े रहते हैं; जैसे-


(i) यदि विमान का किराया देंगे तो ही मैं हैदराबाद जाऊँगा ।


(ii) यदि तुम परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल होगे।


(iii) अगर उसने शादी की होती तो अज इस तरह से भटकना न पड़ता। (iv) अगर मीरा मेरी बात मानेगी तो मैं उसका काम अवश्य करूँगा।