रचना के आधार पर वाक्य के भेद - differences of sentences on the basis of composition
रचना की दृष्टि से सभी वाक्य एक जैसे नहीं होते। कुछ वाक्यों की रचना 'एक क्रिया पदबंध के द्वारा होती है तो कुछ की रचना 'दो या दो से अधिक क्रिया पदबंधों के द्वारा। देखिए निम्नलिखित उदाहरण- -
एक क्रिया पदबंध वाले वाक्य
एकाधिक क्रिया पदबंध वाले वाक्य
(i) लड़का बाज़ार गया है।
(iii) जो लड़का बाज़ार गया है वह मेरा भाई है।
;(iv) लड़का बाज़ार गया है और लड़की खाना बना रही है।
(ii) लड़की खाना बना रही है।
एक क्रिया पदबंध वाले वाक्यों को 'सरल वाक्य' तथा एक से अधिक क्रिया पदबंध वाले वाक्यों को 'जटिल वाक्य' कहा जाता है। ऊपर के उदाहरणों में वाक्य (i) तथा (ii) 'एक क्रिया पदबंध' होने के कारण 'सरल वाक्य' हैं तथा वाक्य (iii) तथा (iv) एक से अधिक क्रियाएँ होने के कारण 'जटिल वाक्य' हैं।
परन्तु सभी जटिल वाक्यों की रचना एक जैसी नहीं होती। वाक्य (iv) में आने वाले दोनों 'उपवाक्य' 'समान स्तर' के हैं।
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इनको हम वाक्य से बाहर निकाल कर अलग से स्वतन्त्र रूप में भी बोल सकते हैं। अर्थात् यह कहा जा सकता है कि 'लड़का बाज़ार गया है' तथा 'लड़की खाना बना रही है'। लेकिन वाक्य (ii) के उपवाक्य - 'वह मेरा भाई है' को तो हम अलग से स्वतन्त्र रूप में बोल सकते हैं पर दूसरे उपवाक्य 'जो लड़का बाज़ार गया है' को स्वतन्त्र रूप से नहीं बोल सकते क्योंकि यह उपवाक्य दूसरे उपवाक्य 'वह मेरा भाई है' पर आश्रित है।
इस तरह प्रत्येक भाषा के 'जटिल वाक्यों' में दो तरह के उपवाक्य मिलते हैं। कुछ 'स्वतन्त्र उपवाक्यों' वाले जटिल वाक्य तथा कुछ ऐसे जटिल वाक्य जिनमें एक 'प्रधान उपवाक्य' हो तथा अन्य उस पर 'आश्रित उपवाक्य' हों। ऊपर के वाक्य (
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iii) में एक उपवाक्य 'आश्रित उपवाक्य' है और दूसरा 'प्रधान उपवाक्य' जबकि वाक्य (iv) के दोनों उपवाक्य परस्पर 'स्वतन्त्र उपवाक्य' हैं। न कोई किसी का 'प्रधान' है और न कोई किसी का 'आश्रित' । स्वतन्त्र उपवाक्यों को 'समानाधिकृत उपवाक्य' (समान अधिकार वाले) भी कहा जाता है। अतः ध्यान रखिए जिस जटिल वाक्य में एक 'प्रधान उपवाक्य' तथा शेष 'आश्रित उपवाक्य' होते हैं उसे 'मिश्र वाक्य' कहते हैं तथा जिसमें सभी 'समानाधिकृत' या 'स्वतन्त्र' उपवाक्य होते हैं उसे 'संयुक्त वाक्य' कहते हैं। कभी-कभी कुछ 'जटिल वाक्य' ऐसे भी हो सकते है जिनमें 'एक प्रधान उपवाक्य' हो 'दूसरा आश्रित उपवाक्य' तथा 'तीसरा स्वतन्त्र उपवाक्य।
(1) सरल वाक्य
जैसा ऊपर स्पष्ट किया गया, जिन वाक्यों में 'एक उद्देश्य' तथा 'एक विधेय' होता है वे 'सरल वाक्य'
;(Simple Sentences) कहलाते हैं। ध्यान रखिए, 'सरल वाक्य' की सबसे बड़ी पहचान यही है कि उसमें केवल एक ही 'क्रिया पदबंध' होता है। देखिए निम्नलिखित उदाहरण-
(क) कथनात्मक या विधान वाचक सरल वाक्य-
(1) सब लोग घर चले गए।
(ii) उन लोगों ने अपना काम पूरा कर लिया।
(iii) मैं कल लंदन जा रहा हूँ।
(ख) प्रश्नवाचक सरल वाक्य-
(0) आपकी गाड़ी कहाँ है ?
;(ii) आप यहाँ से कैसे जाएँगे ?
(iii) क्या कल बारिश आयी थी ?
इनमें निषेधात्मक प्रश्नवाचक वाक्य भी आ सकते हैं, जैसे-
(1) तुम कल क्यों नहीं आए ?
(ii) आपने खाना क्यों नहीं खाया।
(iii) क्या वह नहीं आएगी ?
(ग) आज्ञार्थक सरल वाक्य -
(1) तू यहाँ से जा
;(ii) तुम अपना काम करो।
(iii) कल जल्दी आ जाना ।
(iv) अपना काम कीजिए ।
इनमें भी निषेधात्मक वाक्य आ सकते हैं, जैसे-
(1) आज फिल्म मत देखना ।
(ii) शादी मत करना।
(iii) मुझे गाली मत दो।
;(iv) झूठ मत बोलो
(घ) निषेधात्मक सरल वाक्य
(1) बच्चे घर नहीं पहुँचे हैं।
(ii) नौकर ने काम नहीं किया है।
(iii) मैं थोड़े ही उससे मिलूँगा ।
(ङ) सम्भावनार्थक सरल वाक्य
हो सकता है वह सही सलामत हो।
;शायद ट्रेन आ गई हो।
इस वर्ग में निषेधात्मक वाक्य भी आ सकते हैं, जैसे-
हो सकता है वहाँ बारिश न आई हो।
शायद अभी फिल्म शुरू न हुई हो ।
(च) इच्छार्थक सरल वाक्य
(1)
चलो अब खाना खाया जाए।
(ii) आपकी यात्रा शुभ हो।
;(छ) विस्मयादिबोधक सरल वाक्य
(1) वाह ! कितनी बढ़िया कॉफ़ी बनाई है।
(ii) छि ! बहुत बदबू है।
(2) जटिल वाक्य
1. संयुक्त वाक्य
संयुक्त वाक्यों में सभी उपवाक्य 'स्वतन्त्र उपवाक्य' होते हैं तथा प्रत्येक उपवाक्य का स्तर समान होता है। इसीलिए इन उपवाक्यों को 'समानाधिकृत उपवाक्य' कहा जाता है तथा संयुक्त वाक्यों के उपवाक्य प्रायः 'और',
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'एवं', 'तथा', 'या', 'अथवा', 'नहीं तो', 'इसलिए', 'कि', 'अतः', 'पर', 'परन्तु', 'किन्तु', 'लेकिन', 'वरना', 'मगर', 'या... या', 'न... न', आदि समुच्चयबोधक अव्ययों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं; जैसे-
(i) आप चुप रहिए और अपना काम कीजिए ।
(ii) मैं यहीं रहूँगा तथा तुमको को भी साथ रखूँगा ।
(iii) तुम आ रही हो या तुम्हारी बहन आ रही है ?
(iv) ठीक से बात करो नहीं तो चले जाओ।
;(v) होमवर्क पूरा कर लो वरना टीचर नाराज़ होंगी। (vi) वह बीमार है पर अभी भी काम करती रहती है।
संयुक्त वाक्यों के भेकप्रभेद-
संयुक्तवाक्यों में आने वाले समुच्चयबोधक अव्यय चार तरह के कार्य करते हैं-
(क) उपवाक्यों को जोड़ने का
(ख) उपवाक्यों को विभाजित करने का
(ग) उपवाक्यों के बीच विरोध प्रकट करने का
;(घ) उपवाक्यों के बीच कारण तथा परिणाम का सम्बन्ध प्रकट करने का
(क) संयोजक संयुक्त वाक्यः
कार्य :- उपवाक्यों को जोड़ना, समुच्चयबोधक अव्यय :- 'और', 'तथा', 'एवं'। देखिए उदाहरण- -
(1) आप चलिए और किसी को भेज दीजिये।
(ii) वह खुद चलेगी तथा आपको भी ले चलेगी।
(iii) भाईसाहब काम करेंगे एवं भाभीजी बाज़ार जायेंगी।
(iv) आप आइए और डिनर कीजिए।
;(ख) विभाजक संयुक्त वाक्यः
कार्य :- उपवाक्यों को विभाजित करना, समुच्चयबोधक अव्यय :- 'या', 'अथवा', 'की', 'नहीं तो',
'अन्यथा', 'न कि', 'नन' आदि।
(1) खिचड़ी खाओगे या दाल-चावल खाओगे ?
(ii) पहुँच जाओ वरना मुलाक़ात नहीं होगी। (iii) न कभी मिला न बात की।
(iv) बिल जमा करो नहीं तो फ़ोन कट जाएगा।
(ग) विरोधवाचक संयुक्त वाक्यः
कार्य :- उपवाक्यों की बीच विरोध प्रकट करना, समुच्चयबोधक अव्यय - 'किन्तु', 'परन्तु', 'लेकिन',
;'मगर', 'पर' आदि।
(1) मैं आऊँगा तो सही पर खाना नहीं खाऊंगा।
(ii) मैं ने समझाया था लेकिन वह मानी नहीं।
(iii) वह चला तो गया किन्तु भूलता नहीं है।
(iv) यहाँ बैठो परन्तु बात मत करो।
(घ) परिणामवाची संयुक्त वाक्य
कार्य :- दोनों उपवाक्यों के बीच कारण तथा परिणाम का सम्बन्ध प्रकट करना, समुच्चयबोधक अव्यय 'अतः', 'इसलिए', 'सो', 'अतएव' आदि।
;आज परीक्षा है अतः कोई नहीं मिलेगा।
(ii) मुझे दवाई चाहिए थी इसलिए बाज़ार तक गया था।
(iii) मैं थक गया था सो आराम करने बैठ गया ।
(iv) फीस नहीं जमा की अतएव स्कूल से निकाल दिया।
2. मित्र वाक्य (Complex Sentence):
जिन जटिल वाक्यों में एक 'प्रधान उपवाक्य' तथा शेष उस पर 'आश्रित उपवाक्य' होते हैं, उसे 'मिश्र वाक्य' कहते हैं।
हम यह तो बता ही चुके हैं कि 'प्रधान उपवाक्य' वह उपवाक्य होता है जिसका उच्चारण अलग से स्वतन्त्र रूप में किया जा सकता है, जबकि 'आश्रित उपवाक्यों' का उच्चारण स्वतन्त्र रूप से नहीं किया जा सकता।
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