सर्वनाम के भेद-प्रभेद - discrimination of pronouns
जिस तरह सभी संज्ञा शब्द एक प्रकार के नहीं होते, उसी तरह सभी 'सर्वनाम शब्द' भी एक जैसे नहीं होते। सर्वनामों के निम्नलिखित भेद किए जाते हैं-
1. पुरुषवाचक सर्वनाम-
जब भी दो लोग बातचीत करते हैं तो वक्ता कभी अपने बारे में कुछ कहता है, कभी श्रोता के बारे में और कभी किसी तीसरे व्यक्ति के बारे में जो वहाँ मौजूद नहीं होता। इन तीनों ही स्थितियों में वक्ता द्वारा अपने लिए, श्रोता के लिए तथा उस तीसरे अनुपस्थित व्यक्ति के लिए जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया जाता है वे सर्वनाम 'पुरुषवाचक सर्वनाम' कहलाते हैं। इन्हीं आधारों पर पुरुषवाचक सर्वनामों के तीन भेद किए जाते हैं 'उत्तम पुरुष', 'मध्यम पुरुष' तथा 'अन्य पुरुष' ।
(i) उत्तम पुरुष-
जिन सर्वनामों का प्रयोग वक्ता अपने नाम के स्थान पर करता है, वे सर्वनाम 'उत्तम पुरुष' के सर्वनाम कहलाते हैं। इस वर्ग के अन्तर्गत एकवचन में 'में' तथा 'मैं के सभी रूप' (मैंने, मुझे, मेरा आदि) तथा बहुवचन में 'हम' तथा 'हम के सभी रूप' (हमने, हमें, हमारा आदि) आते हैं।
(ii) मध्यम पुरुष-
वक्ता द्वारा श्रोता के नाम के स्थान पर जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है, वे 'मध्यम पुरुष' के सर्वनाम कहलाते हैं। इस वर्ग में 'तू' (एकवचन), 'तुम' (बहुवचन) तथा 'आप' (बहुवचन आदरसूचक सर्वनाम तथा इनके विभिन्न रूप आते हैं।
हिन्दी में 'तुम' तथा 'आप' का प्रयोग एकवचन में होने लगा है, इसलिए बहुवचन में इनके साथ 'लोग' शब्द जोड़ा जाता है, जैसे- तुम लोग, आप लोग आदि ।
(iii) अन्य पुरुष -
वक्ता या श्रोता के द्वारा जब किसी अन्य व्यक्ति के नाम के स्थान पर जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है वे 'अन्य पुरुष' के सर्वनाम कहलाते हैं। इस वर्ग में एकवचन के अन्तर्गत 'वह' तथा उसके विभिन्न रूप जैसे- 'उसनें', उससे, 'उसमें' आदि आते हैं तथा बहुवचन के अन्तर्गत 'वे' तथा उसके विभिन्न रूप जैसे 'उनसे',
'उनका', 'उन्होंने' आदि आते हैं। हिन्दी में 'वे' सर्वनाम का प्रयोग भी एकवचन में होने लगा है अतः बहुवचन में इसके साथ भी 'लोग' शब्द लगाया जाता है, जैसे वे लोग मंत्रीजी से मिलना चाहते हैं।
2. निश्चयवाचक सर्वनाम-
जिन सर्वनामों से किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति का पता चलता है वे 'निश्चयवाचक सर्वनाम' कहे जाते हैं। इसके अन्तर्गत एकवचन में 'यह / वह' तथा बहुवचन में 'ये / वे' रूप आते हैं। 'यह' तथा 'ये' का प्रयोग निकट के व्यक्तियों एवं वस्तुओं के लिए किया जाता है तथा वह / वे' का प्रयोग दूर के व्यक्तियों / वस्तुओं के लिए, जैसे-
'यह' / 'ये' तथा उनके रूप
i. अध्यापक- ( पास में रखी कुरसी की और संकेत करते हुए) अब्दुल, इसे यहाँ से ले जाओ ।
'वह' / 'वे' तथा उनके रूप
ii. पिता - ( दूर पड़ी किताब की और संकेत करते हुऐ वह किसकी है?
जिन व्यक्तियों या वस्तुओं की ओर संकेत किया जाता है वे वक्ता और श्रोता के सामने उपस्थित होने चाहिए। यदि इन सर्वनामों का प्रयोग ऐसे व्यक्तियों / वस्तुओं के लिए किया जाता है जो वक्ता तथा श्रोता के सामने उपस्थित नहीं हैं तो ये सर्वनाम 'पुरुषवाचक सर्वनाम' की कोटि में आते हैं।
iii. अनिश्चयवाचक सर्वनाम-
जब किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में यह निश्चय न हो कि वह व्यक्ति कौन है या वह वस्तु क्या है तब जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाता है वे 'अनिश्चयवाचक सर्वनाम' कहलाते हैं। अतः अनिश्चयवाचक सर्वनाम वे सर्वनाम हैं जिनसे किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का पता न चलता हो । हिन्दी में 'कोई' (व्यक्ति के लिए) तथा 'कुछ' (वस्तु के लिए) 'अनिश्चयवाचक सर्वनाम' हैं।
(1) शायद दरवाज़े के बाहर कोई खड़ा है।
(ii) आपसे मिलने कोई आया है।
(iii) बाज़ार से कुछ लेते आना।
(iv) ओढ़ने के लिए मुझे भी कुछ दे दो।
iv. प्रश्नवाचक सर्वनाम -
कई बार किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में मन में प्रश्न उठते रहते हैं कि वह व्यक्ति कौन है या वह वस्तु क्या है । ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति या वस्तु के स्थान पर हम 'प्रश्नवाचक सर्वनामों का प्रयोग करते है। हिन्दी में प्रश्नवाचक सर्वनाम हैं- 'कौन' (व्यक्ति के लिए) तथा 'क्या', 'कौन-सा', 'कौन-सी' (वस्तु या घटना के लिए)। देखिए उदाहरण-
(i) यहाँ कौन रहता है ?
(ii) कौन शोर कर रहा था ?
आज आपने क्या बनाया है?
(iv) आप क्या लेना पसंद करेंगे ?
(v) तुम्हें क्या चाहिए ?
(vi) इन साड़ियों में से तुम्हें कौनसी पसंद है ?
V. सम्बन्धवाचक सर्वनाम-
मिश्र वाक्यों में एक प्रधान उपवाक्य होता है तथा शेष आश्रित उपवाक्य। कुछ सर्वनाम ऐसे होते हैं जो आश्रित उपवाक्यों को प्रधान उपवाक्य के साथ जोड़ने का कार्य करते हैं। इनको 'सम्बन्धवाचक सर्वनाम' कहा जाता है। हिन्दी में 'जो' तथा 'जिसे' सम्बन्धवाचक सर्वनाम हैं। देखिए इनके उदाहरण-
(1) वह लड़का चला गया जो अक्सर झूठ बोलता है।
(ii) वह किताब फट गई जिसे तुमने दिया था।
(iii) वह मकान गिर गया जिसकी दीवार कच्ची थी।
(iv) जो चोरी करता है, वह अवश्य पकड़ा जाता है।
vi. निजवाचक सर्वनाम-
'निज' शब्द का अर्थ होता है 'अपना' 'निजवाचक सर्वनाम' वे सर्वनाम हैं जिनका प्रयोग वक्ता के द्वारा वाक्य के कर्त्ता के लिए किया जाता है। हिन्दी में 'स्वयं', 'खुद', 'अपने आप', 'आप ही' आदि 'निजवाचक 'सर्वनाम' हैं। देखिए उदाहरण-
(1) अब इस काम को वह स्वयं करेगा।
(ii) वह खुद खाना बना सकती है।
(iii) तुम अपने आप अपना काम क्यों नहीं करते ?
(iv) वह अपने आप अपने कपड़े धोता है।
वार्तालाप में शामिल हों