Distinction of nouns: on the basis of function

वाक्य में प्रयुक्त शब्द अर्थात् पद का 'पदनाम' इस बात पर निर्भर करता है कि वह उस वाक्य में क्या प्रकार्य कर रहा है। कभी-कभी संज्ञा शब्दों के अलावा अन्य वर्गों के शब्द भी वाक्य में संज्ञा का प्रकार्य करने लगते हैं तब उस सन्दर्भ में हम उसका 'पदनाम' भी बदल जाता है। संज्ञा का प्रकार्य करने के कारण उस सन्दर्भ में ऐसे पद 'संज्ञा पद बन जाते हैं। यहाँ हम प्रकार्य के आधार पर होने वाले संज्ञा के भेदों की चर्चा करेंगे-


1. क्रियात्मक संज्ञा (Verbal Noun)-


अनेक बार हमें हिन्दी में ऐसे प्रयोग देखने को मिलते हैं जिनमें 'क्रिया' शब्द क्रिया का प्रकार्य न कर 'संज्ञा पद' का प्रकार्य करते पाए जाते हैं तब उन्हें 'क्रियात्मक संज्ञा' कहा जाता है, जैसे-


i. अच्छे स्वास्थ्य के लिए सुबह टहलना बहुत आवश्यक है।


ii. तुम अब रोना बन्द करो।


आपका बतियाना मुझे पसंद नहीं।


उपर्युक्त वाक्यों में आए सभी रेखांकित पद मूलतः क्रिया शब्द थे पर इन वाक्यों में तीनों 'संज्ञा' का प्रकार्य कर रहे हैं। अतः इस सन्दर्भ में ये सभी 'संज्ञा पद' हैं। क्रिया शब्दों से बने ऐसे पद जो वाक्य में संज्ञा का प्रकार्य करते हैं 'क्रियात्मक संज्ञा' कहे जा सकते हैं।


2. विशेषणात्मक संज्ञा (Adjectival Noun)-


जिस तरह कुछ क्रिया शब्द वाक्य में संज्ञा का प्रकार्य करते हैं उसी तरह कुछ विशेषण का भी प्रकार्य करते हैं। ऐसी स्थितियों में 'विशेष्य' (संज्ञा पद) का लोप कर दिया जाता है तथा संज्ञा पद में लगाने वाले प्रत्यय विशेषण में लग जाते हैं, जैसे-


I. शराबियों पर मुझे यकीन नहीं ।


ii. इस देश में ईमानदारों की कमी नहीं हैं।


चल झू दे कौन तुझ पर भरोसा करेगा।


iv. मैं मूखों से बात नहीं करता।


ऊपर के वाक्यों में आए 'शराबी', 'ईमानदार', 'झूठा' तथा 'मूर्ख' शब्द मूलतः विशेषण हैं पर यहाँ विशेष्य (संज्ञा पद) का लोप हो जाने के कारण ये संज्ञा का प्रकार्य कर रहे हैं, अतः प्रकार्य के आधार पर इन्हें 'विशेषणात्मक संज्ञा' कहा जा सकता है।