हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति - Etymology of Hindi words

आपने इस तथ्य पर ध्यान दिया होगा कि जब कभी हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति का उल्लेख आता है तब, इस तथ्य को सामने लाया जाता कि हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृतसंज्ञा 'सिन्धु' से हुई है। ज्ञातव्य है, सिन्धु हमारी महानदी (नद) का नाम है। यह महानदी जिस अधिकतर प्रदेश (भूभाग) में बहती है उसी अविभाजित भारतीय प्रान्त का नाम 'सिन्ध' पड़ा, जो विभाजन के बाद, अब पाकिस्तान का सिन्ध-सूबा है और इसी सिन्ध- प्रान्त के लोगों को 'सिन्धी' नाम से जाना जाता था। आप जरूर जानना चाहेंगे कि आखिर इस सिन्ध या सिन्धी का हिन्दी संज्ञा से क्या सम्बन्ध है... ?

आइए, पहले इस पर विचार कर लें... हम जानते हैं अविभाजित भारत विशाल प्रदेश था जिसकी पश्चिमी सीमा से सिन्ध प्रान्त लगा हुआ था। तुर्किस्तान के निवासी तुर्क मुग़ल (मुगल / मुसलमान) इसी प्रदेश-द्वार से 711-712 ई. में मुहम्मद बिन क़ासिम की अगुआई में सिन्ध के सनातनी हिन्दु / हिन्दू वैष्णवधर्मी राजा ड्राहिर (दाहिर) को पराजित कर सिन्ध प्रान्त में दाखिल हुए। जब तुर्कों ने इस प्रान्त को सिन्ध के नाम से जाना तो उन्होंने इसका (सिन्ध) उच्चारण हिन्द (कर) के रूप में किया, चूँकि मुगलों की भाषा फ़ारसी (परशी), ईरानी की उपशाखा) में 'स' ध्वनि का उच्चारण 'ह' के रूप में किया जाता है,

अतः सिन्ध > हिन्द बना और सिन्धुनद का इलाका सिन्धुस्थान > हिन्दुस्तान (सिन्धु > हिन्दू-हिन्दु) बना । इसी आधार पर, सिन्धुनद के आसपास रहने वाले सिन्धी निवासियों को हिन्दी (परशी में) कहा जाने लगा। इसी प्रकार सप्त > हफ्त बनकर, सप्ताह > हफ़्ता बना। (भाषाविज्ञान भोलानाथ तिवारी, 1967, किताबमहल, इलाहाबाद, पृ. 165 एवं सामान्य भाषाविज्ञान - बाबूराम सक्सेना, 1961, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग, पृ. 350)। आगे चलकर, यही हिन्दी भारत की प्रमुख सम्पर्क भाषा एवं राजभाषा बनी। आइए, इन्हीं सन्दर्भों में अब हम हिन्दी शब्द के व्यापक भाषिक अर्थ को समझते हुए उसे परिभाषित करने का प्रयास करें....