प्रयोगात्मक हिन्दी अध्ययन/अध्यापन - Experimental Hindi Study/Teaching

प्रस्तुत पाठ के पूर्व मुद्दे में हमने हिन्दी के प्रयोगात्मक सक्रिय क्षेत्रों जैसे, सामाजिक-सम्पर्क / व्यवहार, आर्थिक (वाणिज्यिक बैंकिंग / बीमा / उपभोक्ता जिंसों आदि से सम्बन्धित विपणन (Marketing)}), धार्मिक, शैक्षणिक (साहित्य / कला / विज्ञान तकनीकी / मीडिया आदि), मनोरंजन, खेल, पर्यटन, राजनैतिक आदि क्षेत्रों / उपक्षेत्रों, की चर्चा की है। चलिए, इन व्यावहारिक क्षेत्रों के परिप्रेक्ष्य में हम देखें कि / आज / 21वीं सदी में हिन्दी के अध्ययन / अध्यापन / अनुप्रयोग की क्या स्थिति है ?



हिन्दी अनुप्रयोग और अध्ययन/अध्यापन


सम्प्रति, हमारे देश में, लगभग 864 विश्वविद्यालय, 25 हजार महाविद्यालय और लाखों की संख्या में C.B.S.C., लगभग उसी तरह के प्रणाली अन्य पाठ्यक्रम एवं राज्य सरकारों के अपने विद्यालय चलते हैं।

इन सबमें किसी न किसी रूप में हिन्दी का अध्ययन / अध्यापन होता है। इसके अलावा विदेशों में लगभग 140 विश्वविद्यालयों तथा सैकड़ों की संख्या में इंडियनस्कूल्स में हिन्दी किसी न किसी रूप में पढ़ाई जाती है। यह खुला सत्य है कि हर चीज़, आवश्यकतानुसार एक जिन्स (Commodity) के रूप में अपनाई जाती है। आज एक जिन्स भाषा के रूप में हिन्दी भी इससे अछूती नहीं है। तदनुसार हिन्दी का अध्येता / विद्यार्थी, आवश्यकता / प्रयोजनानुसार, इसके ज्ञान को एक उपभोक्ता (Consumer) के रूप में प्राप्त करना / सीखना चाहता है।

आज, हिन्दी अध्ययन की बड़ी माँग इसी रूप में आ रही है। अतः माँग के अनुसार अब, शिक्षण संस्थाएँ, विभिन्न व्यावहारिक क्षेत्रों ** को लेकर अलग-अलग अवधि (पूर्ण / अंश / तात्कालिक (Full / Short / Instant- Crush)) के पाठ्यक्रम चलाने की ओर अग्रसर हो रही हैं। जो संस्थाएँ (विश्वविद्यालय आदि) हिन्दी के नाम पर पारम्परिक तरीक़े से ढर्रे वाला साहित्य पढ़ा रही हैं वहाँ, विद्यार्थियों (उपभोक्ताओं) की संख्या तेजी से गिरती जा रही है और विभाग बन्द होते / सिकुड़ते जा रहे हैं। एक ओर हिन्दी एक भाषाई उद्योग का रूप ले चुकी है और उसी रूप में उसके अध्यापन की माँग आ रही है, दूसरी तरफ हिन्दी विभाग बन्द होते / सिकुड़ते जा रहे हैं। यह विडम्बनापूर्ण स्थिति है।


दृश्य-श्रव्य माध्यमों के लिए समाचार लेखन / वाचन, विज्ञापन-लेखन (Copy-writing), संचालन (Anchoring), पटकथा-लेखन, वृत्तान्त-लेखन / वाक् प्रस्तुतिकार/ खेल-वृत्तकार (Commentary Writer / Commentator) पर्यटन - गाइड, विपणन-एजंट आदि क्षेत्र हैं जहाँ हिन्दी प्रशिक्षित कर्मियों की बड़ी माँग है । अकेले रेडियो, सिनेमा, टी.वी. खेल (क्रिकेट आदि) पर्यटन आदि में, सैकड़ों की संख्या में हिन्दी- प्रशिक्षित कर्मियों के लिए रोजगार के अवसर हैं।

चूँकि, प्राधिकृत शैक्षणिक संस्थाएँ इस दिशा में व्यावसायिक तरीके से काम नहीं कर रही हैं, अतः निजी रूप से कुछ लोग आधी-अधूरी जानकारी देकर इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं।


इस तरह के हिन्दी ज्ञान / कौशल के अधिगम (Learning) और अध्यापन (Teaching) के लिए एक विशेष प्रकार की भाषा तकनीक (शब्द / वाक्य विन्यास / उच्चारण- प्रस्तुति आदि) की माँग करता है। अगले मुद्दे में हम इसी पर चर्चा करेंगे।