हिन्दी शब्द : अर्थ और परिभाषा - Hindi words: meaning and definitions

पिछले मुद्दे में हमने जाना कि हिन्दी शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत के सिन्धु शब्द से हुई है एवं 'सिन्धु' नदी (नद) इलाके के आसपास बसे 'सिन्धी' निवासियों को 'हिन्दी' कहकर सम्बोधित किया गया। परन्तु यहाँ हमारा तात्पर्य उस हिन्दी शब्द (विशेषण / संज्ञा हिन्दी / हिन्दवी पदबंध) से है जिसे हम एक भाषा के रूप में जानते हैं। अब इसी परिप्रेक्ष्य में यह समझा जाए कि 'हिन्दी' शब्द अपनी भाषाई व्यापकता के साथ किस प्रकार भाषाविदों / लेखकों / बुद्धिजीवियों द्वारा परिभाषित होता हुआ आया है ?


(i) प्रसिद्ध भाषाविद् भोलानाथ तिवारी ने शौरसेनी अपभ्रंश से विकसित खड़ीबोली के देवनागरी लिपि में लिखित साहित्यिक रूप को हिन्दी कहकर सम्बोधित किया। इसी हिन्दी-रूप को भारत की राज्यभाषा* (* वास्तव में इसका तात्पर्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 (1) में निर्दिष्ट राजभाषा से है।) के रूप में इंगित किया। संशोधित अरबी-लिपि में लिखे जाने वाले खड़ीबोली- भाषाई रूप को उर्दू कह कर परिभाषित किया। और आगे चलकर हिन्दी-उर्दू के इसी मिले-जुले रूप को, हिन्दुस्तानी + ( + जिसका उल्लेख, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 में भी आया है) कहा गया (भाषाविज्ञान, लेखक : भोलानाथ तिवारी, किताब महल, इलाहाबाद सं. 1967, पृ. 201 ) । 


(ii) हिन्दी को लेकर, चर्चित भाषाविद् बाबूराम सक्सेना का मत है कि "भाषाविज्ञानी इस शब्द को एक अर्थ में इस्तेमाल करते हैं, साहित्यिक दूसरे में। यह बिहार, संयुक्त प्रदेश (उत्तरप्रदेश के आसपास का इलाका), मध्यप्रदेश हिमालय के पहाड़ी प्रान्त तथा पंजाब की साहित्यिक भाषा है...। हिन्दुस्तानी के दो साहित्यिक रूप हैं, देवनागरी लिपि में लिखित हिन्दी (खड़ीबोली) और संशोधित अरबी लिपि में लिखित उर्दू (सामान्य भाषाविज्ञान, लेखक : बाबूराम सक्सेना, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग, सं. 1961, पृ. 374)


(iii) सुप्रसिद्ध भाषाविज्ञानी अशोक केलकर ने हिन्दी-उर्दू के इसी मिले-जुले रूप का 'हिंदू' नामकरण किया, (Studies In Hindi-Urdu by Ashok R. Kelkar, Deccan College Poona, 1968, pg. 2)।


(iv) ऑक्सफोर्ड शब्दकोश में भी हिन्दी (संज्ञा-पदबंध) को स्वतन्त्र रूप से न लेकर, उसे उर्दू (संज्ञा- पदबंध) के साथ जोड़कर, ('नोट' देकर') कुछ इस तरह व्याख्यायित किया है "Hindi-Urdu (* = i.e. In historical linguistics, to mark forms that are reconstructed, not directly attested) * Indo-Aryan, native to a large area centered on the valley of upper Ganges, but spoken more widely across the north of the Indian subcontinent. The national language of Pakistan, where called Urdu and written in Arabic script derived through Persian, and one of the national languages of India, where called Hindi and written by non-Muslims in Devanagari. Distinct from other modern Indo-Aryan languages since around AD 1000 and with a literature from the 12th century" (The Concise Oxford Dictionary of Linguistics, ed. By P.H. MATTHEWS, Oxford University Press, Great Britain; UK, 2007, pg.176)


(v) आज के सन्दर्भों में हिन्दी के सुप्रसिद्ध मनीषी साहित्यकार निर्मल वर्मा ने हिन्दी को लेकर कुछ इस प्रकार का विमर्श रखा है- "मेरे लिए हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं है, अन्य भाषाओं में से एक, बल्कि इससे कहीं अधिक बढ़कर वह मेरे सांस्कृतिक विरासत की अनमोल निधि रही है, जिससे मैंने 'भारतीय' होने की पहचान अर्जित की है। वह मेरे लिए महज अभिव्यक्ति का माध्यम न होकर मेरे 'होने' का साक्षी रही है।" (चेतना का आत्मसंघर्ष, हिन्दी की इक्कीसवीं सदी, हिन्दी उत्सव ग्रन्थ- 2007: सं. : डॉ. कन्हैयालाल नन्दन, भारतीय भाषा संस्कृति सम्बन्ध परिषद्, नयी दिल्ली-11002, 'हिन्दी का आत्मसंघर्ष' निर्मल वर्मा, पृ. 97)


उपर्युक्त परिभाषाओं में आप हिन्दी शब्द के प्रयोजनमूलक अर्थ की व्यापकता को समझ सकते हैं। जाहिर है, हिन्दी पदबंध मात्र एक भाषिक वैयाकरणिक इकाई न होकर, साहित्यिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक आदि नाना सन्दर्भों में प्रयुक्त एक अवधारणात्मक इकाई है जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 351 में बखूबी रेखांकित किया गया है, यथा "संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिन्दी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे जिससे वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्त्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसकी प्रकृति में हस्तक्षेप किए बिना हिन्दुस्थानी में और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं (*) में प्रयुक्त रूप, शैली और पदों को आत्मसात करते हुए और जहाँ आवश्यक या वांछनीय हो वहाँ उसके शब्दभण्डार के लिए मुख्यतः संस्कृत से और गौणतः अन्य भाषाओं से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृद्धि सुनिश्चित करे।" (") सम्प्रति 22 भाषाएँ)} आइए, अब हम हिन्दी शब्द के अवधारणात्मक अर्थ पर विचार करें।