आधुनिक भारतीय आर्यभाषा वर्गीकरण - Modern Indo-Aryan language classification
भारतीय आर्यभाषाओं के अध्ययन का आरम्भ अंग्रेज विद्वानों द्वारा किया गया। उन विद्वानों में जॉन म्स (John Beames : 1837-1902), सैमुअल एच. केलॉग (S.H. Kellogg 1839-1899), डॉ. होर्नले (Dr. Hoernle : 1841-1918) आदि का नाम महत्त्वपूर्ण है। इन विद्वानों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में भारत की भाषाओं का अध्ययन किया। इनमें से होर्नले ने भारत में आर्यों का आगमन और प्रसार कई क्षेत्रों से होने की बात की। बाद में सर जार्ज ग्रियर्सन (Sir George A. Grierson 1851-1941) द्वारा इस मत को स्वीकार किया गया। ग्रियर्सन ने ही सर्वप्रथम 'भारत का भाषा सर्वेक्षण' (Linguistic Survey of India) में आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं को वर्गीकृत रूप से प्रस्तुत किया है। भाषा तत्त्वों के आधार पर उन्होंने आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं को तीन उप-शाखाओं में विभक्त करते हुए छह भाषा समुदायों की बात की, जिसे हम निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते हैं-
(क) बाहरी शाखा (Outer Branch)
(अ) उत्तरी पश्चिमी समुदाय
(1) पश्चिमी पंजाबी (लहँदा )
(2) सिन्धी
(आ) दक्षिणी समुदाय
(3) मराठी
(इ) पूर्वी समुदाय
(4) उड़िया
(5) बांग्ला
(6) बिहारी
(7) असमिया
(ख) मध्य शाखा (Mediate Branch)
(ई) मध्य समुदाय
(8) पूर्वी हिन्दी
(ग) भीतरी शाखा (Inner Branch)
(उ) केन्द्रीय समुदाय
(9) पश्चिमी हिन्दी
(10) पंजाबी
(11) गुजराती
(12) भीली
(13) खानदेशी
(14) राजस्थानी
(ऊ) पहाड़ी समुदाय
(15) पूर्वी पहाड़ी या नेपाली
(16) मध्य या केन्द्रीय पहाड़ी
(17) पश्चिमी पहाड़ी
इनका समूहन करते हुए ग्रियर्सन ने बताया है कि प्रत्येक शाखा की भाषाओं में कुछ समानताएँ होती हैं जो उन्हें अन्य शाखाओं की भाषाओं से अलग करती हैं।
उदाहरण के लिए भीतरी शाखा की भाषाओं में उच्चरित होने वाला 'स' बाहरी शाखा की कुछ भाषाओं में 'श' हो जाता है। इसी प्रकार इनमें प्रत्ययों के जुड़ने के सन्दर्भ में अन्तर बताया गया है।
ग्रियर्सन द्वारा किए गए वर्गीकरण से डॉ. सुनितिकुमार चाटुर्ज्या अपनी असहमति व्यक्त करते हैं । चाटुर्ज्या के आधार पर आधुनिक भारतीय भाषाओं के निम्नलिखित वर्ग प्राप्त होते हैं-
(क) उदीच्य (उत्तरी)
(1) लहँदा
(2) सिन्धी
(3) पंजाबी
(ख) प्रतीच्य (पश्चिमी) (4) गुजराती
(ग) मध्य देशीय
(5) राजस्थानी
(6) पूर्वी हिन्दी
(7) पश्चिमी हिन्दी
(8) बिहारी
(9) पहाड़ी
(घ) प्राच्य (पूर्वी)
(10) उड़िया
(11) बांग्ला
(12) असमी
(ङ) दक्षिणात्य
(13) मराठी
विभिन्न अपभ्रंश भाषाओं से उत्पत्ति के आधार पर सुप्रसिद्ध भाषाविद् देवेन्द्रनाथ शर्मा ने आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं को इस प्रकार से वर्गीकृत करते हुए प्रस्तुत किया है-
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