उपवाक्य - Parenthesis
उपवाक्य से तात्पर्य
जटिल वाक्यों की चर्चा में आपने देखा था कि जटिल वाक्यों की रचना विभिन सरल वाक्यों के मेल से होती है, जैसे- 'वह बच्चा जो अभी भी किताब पढ़ रहा है बहुत परिश्रमी है' तथा 'बच्चा बहुत परिश्रमी है अतः वह अभी भी किताब पढ़ रहा है'; ये दोनों वाक्य-रचना की दृष्टि से 'जटिल वाक्य' हैं (पहला मिश्र वाक्य तथा दूसरा संयुक्त वाक्य)। इनकी रचना निम्नलिखित दो वाक्यों के मेल से हुई है- 'बच्चा किताब पढ़ रहा है' तथा 'बच्चा बहुत परिश्रमी है।' इस तरह, जब सरल वाक्य किसी जटिल वाक्य के अंग बन जाते हैं तब वे सरल वाक्य नहीं कहलाते, उन्हें 'उपवाक्य' कहा जाता है।
;सरल वाक्य और उपवाक्य
आपको बताया गया कि विभिन्न 'सरल वाक्यों' के मेल से ही 'उपवाक्यों' की रचना होती हैं लेकिन जटिल वाक्यों का अंग बन जाने के बाद वे सरल वाक्य न कहलाकर 'उपवाक्य' कहलाते हैं। बात केवल नाम परिवर्तन मात्र की ही नहीं है, उपवाक्य बनाने से पूर्व सरल वाक्यों के स्वरूप में भी कुछ परिवर्तन हो सकता है, जैसे
ऊपर के उदाहरणों - 'वह बच्चा जो अभी भी किताब पढ़ रहा है बहुत परिश्रमी है' तथा 'बच्चा बहुत परिश्रमी है अतः वह अभी भी किताब पढ़ रहा है।
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पर ध्यान दीजिए। पहले वाक्य के दो उपवाक्य हैं. 'वह बच्चा बहुत परिश्रमी है' तथा 'जो अभी भी किताब पढ़ रहा है।' यहाँ पहला सरल वाक्य तो यथावत है लेकिन दूसरे उपवाक्य 'बच्चा किताब पढ़ रहा है' के स्वरूप में थोड़ा सा परिवर्तन किया गया है; अर्थात् 'बच्चा' के स्थान पर 'जो' सर्वनाम का प्रयोग किया गया है। इसी तरह से दूसरे जटिल वाक्य में भी 'बच्चा' के स्थान पर 'वह' सर्वनाम का प्रयोग किया गया है। कहने का तात्पर्य यही है कि सरल वाक्यों और उपवाक्यों में कोई गुणात्मक अन्तर नहीं होता । अन्तर केवल इस बात का होता है कि सरल वाक्यों की सत्ता 'जटिल वाक्यों' के बाहर होती है तो उपवाक्यों की सत्ता 'जटिल वाक्यों' के अन्तर्गत । --
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