पक्ष से तात्पर्य - party means
आपने देखा कि 'काल' के प्रत्यय उन्हीं क्रियाओं में लगते हैं जो घटित होती हैं क्योंकि यदि क्रिया घटित होगी तभी वह घटित होने में कुछ न कुछ समय लेगी। भले ही वह समय एक क्षण का हो, एक घण्टे का हो, एक दिन का हो, या एक युग का हो। 'पक्ष' का सम्बन्ध इस बात से है कि क्रिया कैसे घटित होती है या हुई है। अतः ध्यान रखिए - समय के सन्दर्भ में क्रिया कैसे घटित हुई है, इस बात की सूचना क्रिया-पदबंध में लगने वाले जिन प्रत्ययों से मिलती है वे 'पक्ष' सूचक प्रत्यय कहलाते हैं।
पक्ष के भेद
हिन्दी के क्रिया-पदबंधों में मुख्य रूप से चार प्रकार के 'पक्ष' दिखाई देते हैं-
;(1) आवृत्तिमूलक पक्ष (Repeatative Aspect ) ( प्रत्यय 'तू' )
'आवृत्ति' का अर्थ है 'किसी कार्य का बार बार होना'। सहायक क्रिया के वे 'प्रत्यय' जो 'क्रिया' के बार-बार घटित होने की सूचना देते हैं, 'आवृत्तिमूलक पक्ष सूचक प्रत्यय कहलाते हैं तथा वह क्रिया 'आवृत्ति मूलक पक्ष की होती है।
हिन्दी में 'आवृत्तिमूलक पक्ष सूचक प्रत्यय' है 'तू'। उदाहरण के लिए ' वह गाना गाती है' वाक्य का
अर्थ यह नहीं है कि वह एक बार गाकर रुक जाती है बल्कि इसका अर्थ है कि वह गाने का कार्य बार-बार करती है। आवृत्तिमूलक पक्ष 'वर्तमानकाल' तथा 'भूतकाल' दोनों में पाया जाता है। दोनों ही कालों की क्रिया में 'तू' प्रत्यय लगता है, जैसे-
;(क) वर्तमानकाल आवृत्तिमूलक पक्ष (Present Indefinite) :
(1) वे रोज़ स्कूल जाते है। (ii) वे बड़ों की बात मानते हैं।
(iii) शाम को बारिश होती है।
(iv) चर्च में लोग प्रार्थना करते हैं।
(ख) भूतकाल आवृत्तिमूलक पक्ष (Past Indefinite ) :
(1) वे रोज़ स्कूल जाते थे।
(ii) वे बड़ों की बात मानते थे।
;(iii) शाम को बारिश हो ती थी।
(iv) चर्च में लोग प्रार्थना करते थे।
(2) सातत्यबोधक पक्ष (Continuous Aspect ) : ( प्रत्यय - 'रह)
'सातत्य' शब्द का अर्थ है 'लगातार' या 'निरन्तर' (Continuous ) । अतः सातत्यबोधक पक्ष के वाक्यों में क्रिया के लगातातर या निरन्तर होने की सूचना मिलती है। हिन्दी में निरन्तरता को बताने के लिए क्रिया पदबंध में 'रह' प्रत्यय लगता है।
;अतः ध्यान रखिए सहायक क्रिया के जिन प्रत्ययों से क्रिया के लगातार होने का पता चलता है वे 'सातत्यबोधक पक्ष' के प्रत्यय कहलाते हैं और वह क्रिया 'सातत्यबोधक पक्ष' की होती है।
'हिन्दी में 'सातत्यबोधक' पक्ष सूचक प्रत्यय 'रह्' है। अंग्रेजी में इस पक्ष की सूचना 'ing' से मिलती है। यह पक्ष भी 'वर्तमान' तथा 'भूत' दोनों कालों में पाया जाता है, जैसे-
(क) वर्तमानकाल सातात्यबोधक पक्ष (Present Continuous) :
(1) हम लोग खाना खा रहे हैं।
;(ii) वे गाना सुना रही हैं।
(iii) घोड़े मैदान में दौड़ रहे हैं
(iv) मेरी बहन नृत्य सीख रही है।
ख) भूतकाल सातत्यबोधक पक्ष (Past Continuous ) :
(i) हम लोग खाना खा रहे थे
(ii) वे गाना सुना रही थीं।
;(iii) घोड़े मैदान में दौड़ रहे थे।
(iv) मेरी बहन नृत्य सीख रही थी।
(3) पूर्ण पक्ष (Perfect Aspect ) : (प्रत्यय 'शून्य')
'पूर्ण' का अर्थ है 'पूरा'। जिन वाक्यों में कार्य पूर्ण या समाप्त हो जाता है वे वाक्य 'पूर्ण पक्ष' के वाक्य होते है । अंग्रेजी में इस पक्ष को 'Perfect Aspect' कहा जाता है। हिन्दी में इसके लिए 'शून्य प्रत्यय' (अर्थात् कोई प्रत्यय नहीं) लगता है। अतः सहायक क्रिया के जिन प्रत्ययों से कार्य के पूरा होने की सूचना मिलती है वे 'पूर्ण पक्ष' के प्रत्यय कहलाते हैं तथा वह क्रिया पूर्ण पक्ष की होती है।
;हिन्दी में इस पक्ष के के लिए 'शून्य प्रत्यय' लगता है तथा क्रिया से ही कार्य की पूर्णता का पता चल जाता है। अंग्रेजी में इस पक्ष के लिए 'has', 'have', 'had चिह्न लगते हैं। यह पक्ष भी वर्तमान तथा भूत दोनों कालों में पाया जाता है, जैसे-
(क) वर्तमानकाल पूर्ण पक्ष (Present Perfect) :
(1) तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखा है।
(ii) माँ ने खाना बना लिया है।
(iii) हम बाज़ार हो आये हैं।
;(iv) फिल्म समाप्त हो चुकी है।
(v) अध्यापक कक्षा ले चुके हैं।
(vi) बारिश रुक गई है।
(ख) भूतकाल पूर्ण पक्ष (Past Perfect) :
(1) तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखा था।
(ii) माँ ने खाना बना लिया था।
;(iii) हम बाज़ार हो आए थे।
(iv) फिल्म समाप्त हो चुकी थी।
(v) अध्यापक कक्षा ले चुके थे।
(vi) बारिश रुक गई थी ।
(4) स्थित्यात्मक पक्ष : (चिह्न 'शून्य' प्रत्यय)
यह पक्ष अस्तित्ववाची क्रियाओं में पय जाता है। जिन अस्तित्वावाची वाक्यों में किसी व्यक्ति या वास्तु की स्थिति, अवस्था, दशा आदि का पता चलता है वहाँ 'स्थित्यात्मक पक्ष' होता है, जैसे-
;(1) मेरी बहन बीमार है।
(ii) शीला डॉक्टर है।
(iii) बिल्ली रसोई में है ।
उपर्युक्त वाक्यों में से वाक्य (i) में बहन के बीमार होने की, वाक्य (ii) में शीला के डॉक्टर होने की - - तथा वाक्य (iii) में बिल्ली के रसोई में होने की स्थिति या दशा का पता चल रहा है, अतः यहाँ 'स्थित्यात्मक - पक्ष' है। अन्य तीनों पक्षों की ही भाँती यह पक्ष भी वर्तमान कल एवं भूतकाल दोनों में पाया जाता है।
12345इस तरह आपने देखा कि क्रिया में जहाँ-जहाँ 'कालसूचक प्रत्यय' लगते हैं वहाँ-वहाँ 'पक्षसूचक प्रत्यय' भी लगते हैं क्योंकि दोनों का सम्बन्ध क्रिया के घटित होने से है। क्रिया यदि घटित हुई है तो एक ओर उसके घटित होने वाले समय से उसके 'वर्तमान', 'भूत' और 'भविष्य' की सूचना मिलेगी दूसरी ओर घटित होने में क्रिया कुछ न कुछ समय अवश्य लेगी। समय के सन्दर्भ में क्रिया कैसे घटित होती है बार-बार ( आवृत्ति), लगातार - (सातत्य), पूर्ण हो चुकी है या किसी संज्ञा / सर्वनाम की स्थिति, अवस्था, दशा की सूचना दे रही है (स्थित्यात्मक) आदि के सूचक प्रत्यय क्रिया के 'पक्ष' की सूचना देते हैं ।
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