शैलीविज्ञान का उद्देश्य और प्रकार्य - Purpose and functions of stylistics
शैलीविज्ञान का प्राथमिक लक्ष्य भाषा विज्ञान के उपकरणों के माध्यम से कृति के पाठ के प्रभाव का विवेचन करना है। साहित्यिक आलोचकों के पास चूँकि वह शब्दावली नहीं होती और न ही उनकी वैसी इच्छा होती है जिससे कि वे कृति की वैज्ञानिक व्याख्या कर सकें। उनका ध्यान मुख्य रूप से ऐसे साहित्येतर कारकों पर रहता है जो कृति की भाषा से सम्बन्धित नहीं होते हैं। भाषाविज्ञान और मनोविज्ञान के अनुसन्धानों ने ऐसी कई विधियाँ विकसित की हैं जिनके आधार पर कृति की भाषिक संरचना का बहुत गहराई से अध्ययन-विश्लेषण किया जा सकता है। शैलीविज्ञान इन सभी विधियों का उपयोग करते हुए कृति की अनेक साहित्यिक विशेषताओं,
जैसे कविता के संगीत और आधुनिक कथा-साहित्य में आख्यानों की जटिलताओं आदि की व्याख्या करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
शैलीविज्ञान साहित्य के विश्लेषण तक ही सीमित नहीं है। इसे सामान्य गद्य पत्रकारिता, राजनैतिक भाषणों, धार्मिक प्रवचनों और विज्ञापन आदि अनेक वाचिक और लिखित अभिव्यक्तियों के विवेचन के लिए प्रयोग में लिया जाता है। शैलीविज्ञान का लक्ष्य साहित्यिक कृतियों में प्रयुक्त विशेष भाषा का विश्लेषण नहीं है, बल्कि भाषा के किसी भी रूप की तकनीकी विशेषताओं का अनुसंधान इसका लक्ष्य है।
शैलीविज्ञान साहित्य का भाषिक अध्ययन करता है। वह लेखक विशेष की भाषा प्रकृति और लेखन- शैली का अध्ययन करता है। वह हमें लेखक के उस मन्तव्य को समझने में सहायता करता है जिस मन्तव्य से लेखक ने पाठ या सन्देश रचा है। शैलीविज्ञान उस प्रकार्य की सार्थकता में भी अपना ध्यान लगाता है जो चुनी हुई शैली से पूरा होता है। शैलीविज्ञान कृति के सौन्दर्य और रूप का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए उसमें अन्तर्निहित अर्थ का उद्घाटन करता है।
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