सम्बन्धबोधक - relational

'सम्बन्धबोधक' वे अविकारी शब्द हैं जो संज्ञा / सर्वनाम के बाद प्रयुक्त होकर वाक्य के अन्य संज्ञा / सर्वनामों के साथ सम्बन्ध का बोध कराते हैं। इन्हें 'परसर्ग' भी कहा जाता है। देखिए निम्नलिखित उदाहरण


(1) बच्चे माँ के साथ बाज़ार गए हैं।


(ii) मेरे घर के सामने मन्दिर है।


(iii) वह घर के भीतर छुपा हुआ है।


(iv) पार्क के चारों ओर लोग खड़े हैं।

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(v) आप के अलावा मेरा कोई नहीं है।


(vi) उस लड़के की तरफ देखिए ।


ऊपर के वाक्यों के रेखांकित पद 'के साथ', 'के सामने', 'के भीतर', 'के चारों ओर', 'के अलावा', 'की


तरफ' ऐसे शब्द रूप हैं जो वाक्य में आए दो संज्ञा / सर्वनाम रूपों के मध्य सम्बन्ध स्थापित कर रहे हैं। इन्हें ही 'सम्बन्धबोधक अव्यय' कहा जाता है। सम्बन्धबोधक अव्ययों के कुछ और उदाहरण देखिए-

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(1) से पहले, की ओर की तरफ़


(ii) के बिना, के अलावा, के बगैर


sian: normal; font-variant-numeric: normal; vertical-align: baseline; white-space-collapse: preserve;">(iii) के बदले, की जगह

(iv) के बारे में, के विषय में


(v) के साथ, के संग


(vi) से लेकर, से तक


(vii) के विपरीत, के अनुसार


इन उदाहरणों में 'से पहले', 'के भीतर', 'की ओर',

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आदि कुछ ऐसे सम्बन्धबोधक हैं जो क्रियाविशेषण


की तरह काल, स्थान, दिशा आदि का बोध करते हैं, जैसे-


(i) बच्चा कमरे के भीतर सो रहा है।


(ii) बच्चा दरवाज़े के बाहर गिर गया।


ध्यान रखिए, 'का' परसर्ग को छोड़कर सभी सम्बन्धबोधक संज्ञा या सर्वनाम के साथ मिलकर क्रियाविशेषण का प्रकार्य करते हैं तथा क्रियाविशेषणों की ही भाँति ये भी क्रिया की शक्ति को सीमित करते हैं।

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'क्रियाविशेषण' तथा 'सम्बन्धबोधक' में प्रमुख अन्तर यही है कि जहाँ क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता स्वतन्त्र रूप से बताते हैं वहीं सम्बन्धबोधक या परसर्ग यही कार्य किसी संज्ञा या सर्वनाम के सहयोग से करते हैं, जैसे-


(i) लड़की अन्दर है। (क्रियाविशेषण)


(i) (क) लड़की घर के अन्दर है।


(सम्बन्धबोधक 'के अन्दर,' संज्ञा 'घर' के साथ मिलकर क्रियाविशेषण का प्रकार्य )


(ii) बच्चा ऊपर गया. (क्रियाविशेषण)

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(ii) (क) बच्चा छत के ऊपर गया।


(सम्बन्धबोधक 'के ऊपर,' संज्ञा 'छत' के साथ मिलकर क्रियाविशेषण का प्रकार्य )


परन्तु 'का' परसर्ग संज्ञा / सर्वनाम के साथ लगकर 'विशेषण' का प्रकार्य करते हैं, जैसे-


(1) शीला की बहन अमेरिका में रहती है।


(ii) मेरा भाई कल आएगा।

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(iii) उसने सिल्क की साड़ी खरीदा।


अतः ध्यान रखिए जो सम्बन्धबोधक क्रियाविशेषण का प्रकार्य करते हैं उन्हें 'क्रियाविशेषणात्मक


सम्बन्धबोधक' कहना अधिक उपयुक्त होगा।


निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि हिन्दी में सम्बन्धबोधक अव्ययों का प्रयोग तीन तरह से होता है-


(क) कारकीय चिह्न सहित, जैसे के आगे के पीछे, के मारे आदि ।


(ख) कारकीय चिह्न रहित, जैसे- पर्यन्त (जीवनपर्यन्त), भर (दिन भर ) आदि । (ग) कारकीय चिह्न सहित एवं रहित दोनों रूपों में, जैसे द्वारा / के द्वारा, पार / के पार आदि।