समास - Samas

समास से तात्पर्य


उपसर्गों एवं प्रत्ययों के अलावा 'समास रचना' के माध्यम से भी शब्द निर्माण किया जाता है। समास रचना में दो या दो से अधिक शब्द या पद मिलकर नया शब्द बनाते हैं।


इन सभी उदाहरणों में अलग-अलग अर्थ वाले दो शब्द मिलकर एक तीसरा नया शब्द बना रहे हैं जिसका अर्थ पहले दोनों शब्दों से भिन्न हैं। उदाहरण के लिए पहले उदाहरण में 'नीला' शब्द का अर्थ आप जानते हैं। 'नीला रंग' तथा 'कण्ठ' का अर्थ है 'गला',

परन्तु इन दोनों शब्दों के मेल से बने नये शब्द 'नीलकण्ठ' का अर्थ है 'शिव' । अतः ध्यान रखिए कि समास प्रक्रिया में जो दो पद (शब्द) मिलते हैं उनके अर्थ एक दूसरे से भिन्न होते हैं। तथा उन दोनों के मेल से बने तीसरे नये पद का अर्थ पहले दोनों पदों से भिन्न होता है। समास रचना में भाग लेने वाले पहले शब्द या पद को 'पूर्व पद' तथा दूसरे शब्द को 'उत्तर पद' कहा जाता है तथा इन दोनों के मेल से बने तीसरे पद को 'समस्त पद' कहते हैं;


समास विग्रह-


'समास विग्रह' प्रक्रिया वस्तुतः 'समास रचना' प्रक्रिया के विपरीत है। इसमें समस्त पद के सभी पदों को अलग-अलग करके पहले की स्थिति में लाया जाता है; जैसे 'राजपुत्र' समस्त पद का विग्रह होगा - - 'राजा का


पुत्र' ।


समास के भेद-


समास के मुख्यतः चार भेद होते हैं तत्पुरुष समास, बहुब्रीहि समास, द्वन्द्व समास तथा अव्ययीभाव - समास । तत्पुरुष समास के दो उपभेद हैं- कर्मधारय समास तथा द्विगु समास। इन सब के विषय में आगे आप विस्तार से पढ़ेंगे।