हिन्दी में मध्यम पुरुष सर्वनामों के प्रयोग की स्थिति - Status of the use of middle male pronouns in Hindi

आप जानते हैं कि हिन्दी में माध्यम पुरुष सर्वनाम हैं- 'तू', 'तुम' तथा 'आप'। इनमें 'तू' एकवचन, 'तुम' बहुवचन तथा 'आप' आदरसूचक बहुवचन के सर्वनाम हैं पर, प्रयोग के स्तर पर स्थिति भिन्न है। प्रयोग के स्तर पर इन तीनों का ही प्रयोग एकवचन में किया जाता है। अब प्रश्न उठता है कि किन-किन स्थितियों इन तीनों का प्रयोग एकवचन में होता है ?


प्रायः दो अपरिचित व्यक्ति जब एक-दूसरे से मिलते हैं तो वे परस्पर एक-दूसरे को 'आप' से सम्बोधित करते हैं। धीरे धीरे जब उनमें निकटता बढ़ती चली जाती है तब वे 'आप' का प्रयोग छोड़कर 'तुम' पर आ जाते हैं।

यदि घनिष्ठता बहुत अधिक बढ़ आती है तब वे एक दूसरे को 'तू' से सम्बोधित करते पाए जाते हैं। अतः हिन्दी में 'तू' का एकवचन में प्रयोग अत्यन्त घनिष्ठता (Deep Closeness) की स्थिति में ही होता है। इसके अलावा क्रोध, अनादर जैसी स्थितियों में भी 'तू' का प्रयोग किया जाता है।


आज से कुछ वर्ष पूर्व तक हिन्दी में 'तू' सर्वनाम का प्रयोग घनिष्ठता के अलावा अपने से छोटी उम्र वाले और अपने से छोटे पद, स्टेटस, जाति वाले लोगों के लिए भी दिखाई देता था पर आजकल इन स्थितियों में 'तू' का प्रयोग लगभग समाप्त हो गया है। आजकल तो माता-पिता भी अपने बच्चों को 'तू' से सम्बोधित नहीं करते।

इसके अलावा 'तू' या 'तू सर्वनाम के रूपों का प्रयोग ईश्वर को सम्बोधित करते हुए भी किया जाता है, जैसे- 'हे ईश्वर ! तू मेरी मदद कर।'


इसके विपरीत 'आप' सर्वनाम केवल आदरसूचक ही नहीं है। अनौपचारिक स्थितियों में दो अपरिचित लोग परस्पर एक दूसरे को 'आप' से ही सम्बोधित करते हैं। उस समय दोनों के मन में एक-दूसरे के लिए आदर की भावना होना ज़रूरी नहीं है। यहाँ तक कि लड़ाई-झगड़े के समय भी एक दूसरे को 'आप' सर्वनाम से ही सम्बोधित करते हैं। ऐसी स्थिति में जब अपमान करना हो तब अवश्य 'तू' का प्रयोग करते हैं।