शैलीवैज्ञानिक आलोचना - stylistic criticism
आपने अपने पाठ्यक्रम के द्वितीय सेमेस्टर की तृतीय पाठ्यचर्या 'पाश्चात्य काव्यशास्त्र' के खण्ड - 4: 'आधुनिक समीक्षा की विशिष्ट प्रवृत्तियाँ' के अन्तर्गत इकाई-2 में शैलीविज्ञान के विभिन्न पक्षों का विस्तार से अध्ययन किया है। यहाँ आप शैलीविज्ञान के अर्थ और स्वरूप सम्बन्धी कुछ मुख्य बातों का फिर से अध्ययन करेंगे और हिन्दी में इस प्रवृत्ति के विकास को समझेंगे।
साहित्य पर कभी कम तो कभी ज्यादा विचारों का प्रभाव हमेशा रहा है। विचारों पर अधिक बल दिए जाने के कारण कृति के आन्तरिक गुणों और विशेषताओं का विश्लेषण पूरी तरह नहीं हो पाता है।
इसलिए कृति के आन्तरिक तत्त्वों के उद्घाटन की आवश्यकता अनुभव की गई और साहित्य के विवेचन की नयी पद्धतियों का उद्भव हुआ । कृति के आन्तरिक पक्षों के विश्लेषण के आधार पर उसके मूल्यांकनकी परम्परा भी बहुत पुरानी है । बीसवीं सदी में कृति के आन्तरिक पक्षों को भाषा और साहित्य के केन्द्र में लाने के लिए 'शैली' शब्द सामने आया और इसके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए शैलीविज्ञान का उदय हुआ। 'शैली' शब्द का इतिहास बहुत पुराना है । इसका प्रयोग प्राचीन काव्यशास्त्र में अनेक सन्दर्भों में हुआ है।
शैली का अर्थ
'शैली' अंग्रेज़ी शब्द 'स्टाइल' का हिन्दी रूपान्तरण है। अंग्रेजी शब्द 'स्टाइल' की व्युत्पत्ति लैटिन शब्द 'स्टिलस' से हुई है,
जिसका अर्थ कलम होता है जिसे रोमन लोग मोम की पट्टिकाओं पर लिखने के लिए काम में लेते थे। समय के साथ इसके अनेक अर्थ निकलते गए जिसमें प्रत्येक अर्थ भाषा के विशेष तत्त्व और उसके बोलने के सन्दर्भ में प्रयुक्त हुआ है।
संचार का एक महत्त्वपूर्ण साधन होने के कारण भाषा को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने की कोशिश की गई है। जब हम अपने दैनिक कार्यों और विशेष सामाजिक या व्यावसायिक कार्यों के सिलसिले में अन्य लोगों से वार्तालाप करते हैं, पत्राचार करते हैं तब हम जाने-अनजाने विचार और भाषा की कुछ तकनीकों और विधियों का प्रयोग करते हैं।
हम अपने वाचिक और लिखित संचार में प्रभाव पैदा करने या अपने मन्तव्यों को स्पष्ट करने के लिए अपनी एक ही बात को अलग-अलग ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। यही 'शैली' है विषय का अर्थ स्पष्ट - करने और उसे संप्रेषणीय बनाने के लिए भाषा का विविधरूपी प्रयोग। लेखक या वक्ता के विचारों को सर्वाधिक पूर्णता के साथ प्रकट करने वाली शैली सबसे अच्छी शैली मानी जाती है। जिसे लेखक या वक्ता की व्यक्तिगत शैली कहा जाता है वह उस लेखक या वक्ता द्वारा प्रयुक्त भाषाई इकाइयों, अभिव्यक्ति के साधनों और शैलीगत उपकरणों का विलक्षण संयोजन है जो उसकी अभिव्यक्ति को दूसरों से अलग और विशिष्ट बनाता है।
शैलीविज्ञान का अर्थ
शैली की रचना भाषा के स्तर पर होती है, इसलिए भाषाविज्ञान से उसका गहरा सम्बन्ध है।
शैलीविज्ञान एक व्यापक शब्द है जिसका अलग-अलग भाषा वैज्ञानिकों ने अलग-अलग अर्थ किया है। सामान्य रूप में यह कहा जा सकता है कि यह शैली का अध्ययन है। किसी साहित्यिक विधा या लेखक-विशेष की रचनाओं की शैलीगत विशेषताओं का अध्ययन शैलीविज्ञान है। साहित्यिक भाषा का भाषा वैज्ञानिक विश्लेषण 'शैलीविज्ञान' है। शैलीविज्ञान भाषा के किसी भी रूप के विभिन्न तत्त्वों का अध्ययन है, साहित्य की इसमें कोई विशेष भूमिका नहीं है। शैलीविज्ञान को भाषाविज्ञान की एक शाखा के रूप में परिभाषित किया जाता है,
जिसमें भाषा की शैली का व्यवस्थित विश्लेषण किया जाता है और यह देखा जाता है कि साहित्यिक रचनाओं की विधा, परिवेश और रचनाकार के अनुसार इसमें क्या परिवर्तन घटित होते हैं ? शैली के विश्लेषण का अर्थ कृति की रूपात्मक विशेषताओं का व्यवस्थित अध्ययन करते हुए उस कृति के मूल्यांकन में इन विशेषताओं की सार्थकता निर्धारित करना है । शैलीविज्ञान केवल भाषाविज्ञान के रूपकात्मक तत्त्वों के उद्घाटन का अनुशासन नहीं है। भाषाविज्ञान का अर्थ भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन है। शैलीविज्ञान साहित्यिक रचनाओं के विवेचन में भाषाविज्ञान की वैज्ञानिक खोजों और विधियों का प्रयोग करता है।
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