प्रत्यय - suffix

प्रत्यय से तात्पर्य


हमने आपको बताया था कि नये शब्दों के निर्माण में प्रत्ययों की भी प्रमुख भूमिका होती है । उपसर्गों की तरह प्रत्यय भी भाषा के लघुतम अर्थवान् बद्ध रूप हैं जो मूल शब्द के अन्त में जुड़कर नये शब्दों का निर्माण करते हैं। प्रत्यय भी शब्दों की भाँति भाषा में स्वतन्त्र रूप से प्रयुक्त नहीं हो सकते। उपसर्गों की ही तरह ये भी भाषा की अर्थवान् इकाइयाँ हैं तथा किसी-न-किसी शब्द के साथ बद्ध होकर ही प्रयुक्त होते हैं। कहने का तात्पर्य इतना ही है कि 'प्रत्यय' तथा 'उपसर्ग' में गुणों के स्तर पर कोई अन्तर नहीं होता। अन्तर केवल इस बात का है कि उपसर्ग मूल शब्द के आरम्भ में लगते हैं तो प्रत्यय अन्त में देखिए प्रत्ययों के कुछ उदाहरण-


सहज + ता = सहजता


प्रारम्भ + इक प्रारम्भिक


धन + ई = धनी


नौकर + आनी = नौकरानी


अतः निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि-


(i) 'प्रत्यय' तथा उपसर्ग में गुणों के स्तर पर कोई अन्तर नहीं है।


(ii) प्रत्यय भी भाषा की अर्थवान् इकाइयाँ हैं।


(iii) उपसर्गों की तरह प्रत्यय भी बद्धरूप हैं अतः किसी न किसी मूल शब्द के साथ जुड़कर आते हैं।


(iv) प्रत्यय, शब्द के अन्त में जुड़कर नये-नये शब्दों का निर्माण करते हैं।


'प्रत्यय' किस प्रकार के शब्दों के साथ बद्ध होते हैं या जुड़ते हैं, इस आधार पर प्रत्ययों के दो भेद किए जाते हैं। क्रिया शब्दों के साथ जुड़ने वाले प्रत्यय 'कृत प्रत्यय' कहलाते हैं

तथा क्रिया के अलावा अन्य शब्दों जैसे संज्ञा, विशेषण, अव्यय आदि के साथ जुड़ने वाले प्रत्यय 'तद्धित प्रत्यय' कहलाते हैं। इनके अलावा प्रत्यय का प्रकार्य क्या है इस आधार पर भी प्रत्ययों के भेद किए जाते हैं। अब हम इन सभी भेदों को उदाहारण देकर स्पष्ट करेंगे।


कृत प्रत्यय


वे प्रत्यय जो क्रिया के मूल रूप 'धातु' के साथ जुड़कर संज्ञा विशेषण आदि नये शब्दों का निर्माण करते हैं, 'कृत प्रत्यय' कहलाते हैं।

कृत-प्रत्यय या क्रिया शब्दों में लगने वाले प्रत्यय अलग-अलग प्रकार्य करने वाले संज्ञा / विशेषण शब्द बनाते हैं; इसके आधार पर कृत प्रत्ययों को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जाता है।


तद्धित प्रत्यय


तद्धित प्रत्यय क्रिया शब्दों के अलावा अन्य शब्दों जैसे संज्ञा, विशेषण, अव्यय आदि में लगते हैं और प्रायः संज्ञा / विशेषण शब्द बनाते हैं।