समापिका तथा असमापिका क्रिया - terminal and terminal action

समापिका क्रिया-


ऊपर जिन क्रियाओं की चर्चा की गई वे सब समापिका क्रियाएँ थीं क्योंकि वाक्य इन क्रियाओं पर समाप्त हो जाता है। हिन्दी में ये वाक्य के अन्त में आती हैं। चूँकि वाक्य इन क्रियाओं पर आकर समाप्त होता है अतः ये समापिका क्रियाएँ कहलाती हैं।


असमापिका क्रिया


हिन्दी में समापिका क्रियाओं से ऐसे अनेक शब्द व्यत्पन्न किए जाते हैं जो वाक्य में प्रयुक्त होकर अलग- अलग प्रकार्य करते हैं । क्रिया से बने ऐसे रूपों को 'असमापिका क्रिया' कहा जाता है।

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वस्तुतः ये क्रिया का प्रकार्य न कर संज्ञा विशेषण, क्रियाविशेषण आदि का प्रकार्य करती हैं। संस्कृत में इनको 'कृदन्त' कहा गया था। देखिए निम्नलिखित उदाहरण- -


(1) प्रातः टहलना (संज्ञा) चाहिए।


(ii) आपके लिखे (विशेषण) पत्र खो गए।


(iii) बच्चा दौड़कर (क्रियाविशेषण) आया।


इन सभी वाक्यों के रेखांकित पद वाक्य के अन्त में नहीं आ रहे।