वाच्य एवं प्रयोग - text and usage

जैसा हमने ऊपर भी संकेत किया था कि व्याकरण की अनेक पुस्तकों में 'वाच्य' को लेकर भ्रम की स्थिति है। इन पुस्तकों में 'कर्तृवाच्य' का अर्थ लिया गया है 'जहाँ कर्त्ता प्रधान हो' तथा कर्त्ता की प्रधानता का अर्थ लिया गया है 'जहाँ क्रिया कर्त्ता की संज्ञा के लिंग / वचन के अनुसार बदलती हो'। इसी तरह 'कर्मवाच्य' में 'कर्म की प्रधानता बताते हुए यह माँ लिया गया है कि 'कर्मवाच्य' के वाक्यों में 'क्रिया केवल 'कर्म' की संज्ञा के अनुसार बदलती है। इसी तरह से 'भाववाच्य' के वाक्यों में 'भाव' (क्रिया) को प्रधानता देते हुए यह माँ लिया गया है कि भाववाच्य में क्रिया किसी भी संज्ञा के अनुसार नहीं बदलती।
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वस्तुतः क्रिया के बदलने का सम्बन्ध 'वाच्य' के साथ होता है नहीं है। यह मानना कि 'कर्तृवाच्य' के वाक्यों में क्रिया केवल 'कर्ता' की संज्ञा के अनुसार बदलेगी या 'कर्मवाच्य' में केवल 'कर्म' की संज्ञा के अनुसार, यह एक बहुत बड़ी भ्रान्ति है। 'वाच्य' का अर्थ तो केवल इतना ही है कि वक्ता द्वारा 'कर्त्ता' के कार्य को प्रधानता दी गई है या उसे निरस्त किया गया है। वाक्य की क्रिया किस संज्ञा के अनुसार बदलेगी या प्रयुक्त होगी यह विषय 'प्रयोग' या 'अन्विति' के अन्तर्गत आता है। हिन्दी में क्रिया के 'प्रयोग' या 'अन्विति' के तीन नियम हैं जो इस प्रकार हैं-

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नियम 1: -


यदि कर्त्ता की संज्ञा परसर्ग रहित है तो क्रिया सदैव कर्त्ता की संज्ञा के अनुसार बदलती है जैसे-


(0) लड़का संतरा / रोटी खाता है।


(ii) लड़के संतरे / रोटियाँ खाते हैं।


(iii) लड़की संतरा रोटी खाती है।


(iv) लड़कियाँ संतरे / रोटियाँ खाती हैं।

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उपर्युक्त सभी वाक्यों में 'कर्ता' परसर्ग रहित है अतः सभी वाक्यों में क्रिया कर्त्ता की संज्ञा के लिंग / वचन


के अनुसार बदल रही है। ऐसे 'प्रयोग' जहाँ क्रिया कर्त्ता की संज्ञा के अनुसार बदलती है 'कर्त्तरि प्रयोग' कहे जाते


हैं।


नियम - 2:


यदि कर्त्ता की संज्ञा के बाद कोई भी परसर्ग लगा होगा तो क्रिया उसके अनुसार न बदलकर दूसरी संज्ञा (कर्म की संज्ञा) के अनुसार बदलती है, जैसे-


(1) लड़के / लड़की ने आम खाया।


(ii) लड़के / लड़की ने रोटी खाई ।

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(iii) लड़कों / लड़कियों ने आम खाए।


(iv) लड़के / लड़कियों ने रोटियाँ खाई ।


अतः ध्यान रखिए, जिन वाक्यों में क्रिया 'कर्म' की संज्ञा के अनुसार बदलती है ऐसे प्रयोग को 'कर्मणि प्रयोग' कहा जा है।


नियम - 3:


यदि कर्त्ता तथा कर्म दोनों के बाद परसर्ग आता है तो क्रिया दोनों के अनुसार नहीं बदलती। ऐसी स्थिति में क्रिया 'तटस्थ' (Neutral) हो जाती है।

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क्रिया का तटस्थ रूप वही है जो अन्यपुरुष, पुल्लिंग एकवचन सर्वनाम के साथ भूतकाल में होता है, जैसे उसने खाया, उसने पिया, उसने देखा आदि। क्रिया जब कर्त्ता या कर्म के अनुसार न बदलकर तटस्थ रूप में आती है तो ऐसे 'प्रयोग' को 'भावे प्रयोग' कहा जाता है। अतः ध्यान रखिए-


(क) 'कर्तृवाच्य' के वाक्यों में तीनों ही प्रयोग हो सकते हैं।


(ख) कर्मवाच्य में दो ही प्रयोग सम्भव हैं-

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चूँकि 'कर्मवाच्य' में कर्त्ता के बाद 'से कि द्वारा' परसर्ग लग होता है अतः क्रिया कर्त्ता के अनुसार कभी नहीं बदलती । कर्मवाच्य में या तो क्रिया कर्म के अनुसार बदलती है या कर्त्ता कर्म दोनों के अनुसार नहीं बदलती।


(ग) भाववाच्य में केवल भावे प्रयोग ही सम्भव है -


भाववाच्य के वाक्यों में भी कर्त्ता के बाद 'से कि द्वारा' परसर्ग लगता है अतः क्रिया उसके अनुसार नहीं बदलती तथा 'अकर्मक क्रिया' होने के कारण 'कर्म' होता नहीं है अतः भाववाच्य के वाक्य सदैव 'भाव प्रयोग' में ही होते हैं।