काल, पक्ष तथा वृत्ति - time, side and attitude
काल से तात्पर्य
प्रायः लोग 'काल' (Tens) तथा 'समय' (Time) को एक मान लेते हैं पर ये दोनों एक नहीं हैं। जि तरह 'सेक्स' और 'लिंग' तथा 'संख्या' और 'वचन' एक नहीं हैं उसी तरह 'समय' और 'काल' भी एक नहीं हैं। 'सेक्स' और 'संख्या' की तरह "समय" भी 'भौतिक सत्य' है तथा 'काल' उसी की भाषिक अभिव्यक्ति होने के कारण 'भाषिक सत्य'। इस बात को समझने के लिए निम्नलिखित वाक्यों पर ध्यान दीजिए-
(1) (क) तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखा था। (भूतकाल )
(ख) तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखा है। (वर्तमानकाल)
;(ii) (क) कल मैं दिल्ली जाऊँगा । (भविष्यतकाल )
(ख) कल मैं दिल्ली जा रहा हूँ। (वर्तमान काल )
उपर्युक्त वाक्य (i) (क) तथा (ख) जैसे वाक्यों को व्याकरण की अनेक पुस्तकों में 'भूतकाल' का तथा वाक्य
(ii) (क) तथा (ख) को भविष्यतकाल का बताया गया है। यह तो आप जानते ही हैं कि हिन्दी में
वर्तमानकाल के चिह्न हैं, हूँ हैं आदि हैं, भूतकाल के चिह्न था, थी, थे या आ, ई, ए तथा भविष्यतकाल के - चिह्न - गा, गे, गी माने गए हैं।
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इसी आधार पर वाक्य (i) (क) भूतकाल का वाक्य है तथा वाक्य (i) (ख) वर्तमानकाल का । इसी तरह वाक्य (ii) (क) भविष्यतकाल का होगा और वाक्य (ii) (ख) वर्तमानकाल का किन्तु वाक्य (1) के (क) और (ख) दोनों वाक्यों में तुलसीदास द्वारा रामचरितमानस लिखे जाने की घटना (क्रिया) 'समय' की दृष्टि से 'भूत समय' (Past Time ) में घटित हुई है तथा वाक्य (ii) के (क) और (ख) वाक्यों में दिल्ली जाने की घटना समय की दृष्टि से 'भविष्यत समय' (Future Time) में होने वाली है।
इन उदाहरणों से और कुछ पता चले या न चले इतना तो पता चल ही रहा है की 'काल' (Tense) तथा 'समय' (Time) हमेशा एक होंगे यह आवश्यक नहीं है।
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उपर्युक्त वाक्य (i) (क) तथा (ii) (क) 'समय' और 'काल' की दृष्टि से समान हैं पर वाक्य (i) (ख) वक्ता द्वारा 'भूत समय' की घटना को वक्ता द्वारा अपनी कल्पना से वर्तमान में खींच लिया गया है तथा वाक्य (ii) (ख) में ससमय की दृष्टि से भविष्य में घटित होने वाली घटना को अपनी कल्पना से 'वर्तमान' के सन्दर्भ में प्रस्तुत किया है।
अतः यह कहा जा सकता है कि 'काल' और 'समय' एक नहीं हैं, 'समय' एक भौतिक सत्य है तो 'काल' भाषिक सत्य ।
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