विशेषण के भेद: प्रकार्य के आधार पर - Variations of Adjectives: Based on Function
जैसा ऊपर बताया गया जब विशेषण के अलावा अन्य शब्द वाक्य में विशेषण का प्रकार्य करने लगते हैं। तब वे विशेषण ही बन जाते हैं। ऐसे विशेषणों को प्रकार्यात्मक विशेषण कहा जा सकता है। हिन्दी में इस वर्ग में निम्नलिखित विशेषण आते हैं-
1. सार्वनामिक विशेषण -
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, वाक्य में जब 'सर्वनाम' शब्द 'संज्ञा' की विशेषता बताने का प्रकार्य करने लगते हैं तब वे सर्वनाम नहीं कहे जाते, बल्कि उस सन्दर्भ में 'विशेषण' बन जाते हैं, जैसे 'मेरा' तेरा' आपका', 'जिसका',
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'उसका' आदि सर्वनाम शब्द हैं पर 'मेरा भाई', 'तेरा घर', 'आपका स्कूल' जैसे उदाहरणों में ये 'भाई', 'घर', 'स्कूल' संज्ञाओं की विशेषता बता रहे हैं अतः इस सन्दर्भ में ये 'विशेषण' हैं। अतः ध्यान रखिए जब - सर्वनाम शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर विशेषण का कार्य न कर, किसी संज्ञा की विशेषता बताने का प्रकार्य करने लगते हैं तो वे सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं।
2. नामिक विशेषण -
जिस तरह से सर्वनाम शब्द संज्ञा की विशेषता बता सकते हैं उसी तरह से वाक्यों में प्रयुक्त होकर संज्ञा शब्द भी अन्य संज्ञाओं की विशेषता बता सकते है,
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जैसे 'मोहन का घर'। 'लोहे का जहाज़' 'लकड़ी का - पुल', 'काँच के बर्तन' 'भिंडी की सब्जी' आदि उदाहरणों में समस्त रेखांकित संज्ञा पद अपने अपने संज्ञा पदों की विशेषता बता रहे हैं, अतः ये यहाँ विशेषण हैं। आपने देखा था कि जब सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा की विशेषता बताते हैं तो उनको 'सार्वनामिक विशेषण' कहा जाता है, उसी तरह जब 'नाम' या 'संज्ञा' शब्द किसी 'अन्य 'संज्ञा' की विशेषता बताता है तो उसे कहा जा सकता है। देखिए उदाहरण-
(i) मीरा की सहेली कल नहीं आई।
;(ii) लकड़ी का पुल डूब गया।
(iii) मुझे स्कूल की यूनिफॉर्म नहीं पहननी
(iv) बीमारी का इलाज कराओ।
(v) बेईमानी की आदत मत डालो।
(vi) घोड़े जैसी चाल किसी जानवर की नहीं है।
प्रविशेषण
यह तो आप जान ही गए हैं की विशेषण शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं,
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पर जो विशेषण किसी विशेषण शब्द की विशेषता बताता है, 'प्रविशेषण' कहलाता है, जैसे- 'वह बहुत परिश्रमी बालक है' वाक्य में 'परिश्रमी' शब्द 'बालक' संज्ञा की विशेषता बताने के कारण 'विशेषण' है किन्तु इसके पहले लगा हुआ 'बहुत' विशेषण 'परिश्रमी' विशेषण की विशेषता बता रहा है। व्याकरण ऐसे विशेषणों को जो किसी अन्य विशेषण की विशेषता बताते हैं 'प्रविशेषण' कहे जाते हैं। देखिए अन्य उदाहरण-
(1) वह बहुत बेईमान व्यक्ति है।
(ii) मुझे कम मीठी चाय पसंद है।
(iii) कक्षा में लगभग दस छात्र हैं।
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