वैदिक संस्कृत - Vedic Sanskrit
वैदिक संस्कृत की ध्वनियाँ
मूल भारोपीय ध्वनियों से वैदिक संस्कृत की ध्वनियों की तुलना करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि यहाँ तक आते-आते ध्वनियों में पर्याप्त परिवर्तन हो गया था। व्यंजनों में च वर्ग और ट वर्ग दो नये वर्ग आ गए थे। ष, श आदि कुछ फुटकर ध्वनियाँ भी उग आयी थीं। दूसरी ओर तीन क वर्गों के स्थान पर केवल एक रह गया था । स्वरों और स्वनत या अर्द्धस्वरों में बहुत परिवर्तन हो गया था।
ध्वनियों की सूची इस प्रकार है -
मूल स्वर अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ऋ, लृ
सयुक्त स्वर
कण्ठ्य
ए (अ), ओ (अउ ), ए (आइ), औ (आउ)
क, ख, ग, घ, ङ
तालव्य च, छ, ज, झ, ञ
मूर्द्धन्य
ट, ठ, ड, ढ, ळ, कह, ण
दन्त्य त, थ, द, ध, न
ओष्ठ्य
दन्तोष्ठ्य
अन्तस्थ
प, फ, ब, भ, म
व
य, र, ल, व
अनुनासिक अनुस्वार (:-)
संघर्षी
श, ष, स, ह, un ( जिह्वामूलीय) un (उपध्मानीय )
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