वाच्य परिवर्तन के नियम - voice change rules

हिन्दी के वाच्य परिवर्तन के नियमों को हम यहाँ अंग्रेजी भाषा के नियमों के साथ तुलना करके स्पष्ट करेंगे अतः अंग्रेजी में 'कर्तृवाच्य' को Active Voice तथा 'अकर्तृवाच्य' को Passive Voice कहते हैं। दोनों भाषाओं के कर्तृवाच्य एवं अकर्तृवाच्य के निम्नलिखित उदाहरणों पर ध्यान दीजिए-


इनके अलावा हिन्दी के 'अकर्तृवाच्य' के वाक्यों की कुछ विशेषताएँ और भी हैं जिनका ध्यान रखना चाहिए-

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(1) हिन्दी में 'कर्तृवाच्य' से 'अकर्तृवाच्य' बनाते समय कर्त्ता के बाद 'से' या 'के द्वारा' प्रत्यय अवश्य लगता है। पर ध्यान रखिए बोलचाल की भाषा में प्रायः 'के द्वारा' का प्रयोग 'सकारात्मक या विधानवाचक वाक्यों' (Affirmative sentences) में तथा 'से' का प्रयोग 'निषेधात्मक वाक्यों' (Negative Sentences) में किया जाता है।