भारत भूमि वंदनीय - गीत | Bharat Bhumi Vandniya - Geet

 



भारत भूमि वंदनीय

भारत भूमि वंदनीय, पावन तेरी शान है।
जन-जन में संस्कार जगे, यही हमारा गान है॥

 

हिमगिरि जिसका मुकुट सजे, सागर चरण पखारें,
गंगा-यमुना की धारा में, जीवन सुधा उतारें।
वन-उपवन, पर्वत, सरिता प्रकृति यहाँ वरदान है।

 

हर आँगन में प्रेम खिले, परिवार बने उपवन,
माता की ममता में बसता, सुख-शांति का सावन।
सेवा, त्याग, समर्पण से ही, जीवन का सम्मान है।

 

जब-जब संकट आया हम पर, वीर यहाँ मुस्काए,
माटी की रक्षा के खातिर, प्राणों तक दे जाएँ।
रग-रग में बहता साहस, यह वीरों की पहचान है।

 

ज्ञान, तपस्या, कर्म-पथ पर, चलता भारत न्यारा,
सत्य, धर्म, करुणा से जग में, फैलाए उजियारा।
विश्व-बंधुत्व का संदेशा, भारत की पहचान है।


भारत भूमि वंदनीय, पावन तेरी शान है।
जन-जन में संस्कार जगे, यही हमारा गान है॥

-            डॉ. गौरव कुमार