जमुई में विराट हिंदू सम्मेलन का ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी आयोजन


बिहार के आकांक्षी जिला जमुई की पावन धरती पर सामाजिक जागरण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं राष्ट्रीय चेतना के सशक्त संदेश के साथ एक भव्य एवं ऐतिहासिक विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन 22 फरवरी 2026 को किया गया। समस्त हिन्दू समाज, जमुई के तत्वावधान में +2 हाई स्कूल विद्यालय मैदान, जमुई, बिहार में आयोजित इस सम्मेलन ने जनभागीदारी, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्र्म का मंच संचालन समाज वैज्ञानिक डॉ. गौरव कुमार, आईसीएसएसआर पोस्ट डोकटोरल फैलो ने किया। कार्यक्रम में जिले के स्थानीय नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि समाज आज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने के लिए तत्पर है। सम्मेलन स्थल पर भारत माता के चित्र एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण से सुसज्जित था, जिसने कार्यक्रम को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।


सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। उपस्थित जनसमूह द्वारा भारत माता के जयघोष ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत कर दिया। सामूहिक रूप से गायत्री मंत्र उच्चारण एवं हनुमान चालीसा पाठ ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की, जिससे उपस्थित जनसमूह में एकता एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। सम्मेलन का मूल उद्देश्य हिंदू समाज में संगठन, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करना था। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना और जीवन दर्शन का जीवंत स्वरूप है।

मुख्य वक्तव्य एवं पंच परिवर्तन का संदेश

सम्मेलन की मुख्य वक्ता श्रीमती संगीता सिन्हा जी, वर्ग वर्गीन, राष्ट्रीय सेविका समिति ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में समाज परिवर्तन के लिए आवश्यक पंच परिवर्तन की अवधारणा को विस्तार से प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक जागरण से संभव होता है। इसके लिए पाँच प्रमुख क्षेत्रों में परिवर्तन आवश्यक है

1. सामाजिक समरसता का निर्माण: समाज में व्याप्त जातीय, आर्थिक एवं सामाजिक विभाजनों को समाप्त कर समानता, सहयोग और आत्मीयता की भावना विकसित करना आवश्यक है। जब समाज एकजुट होगा तभी राष्ट्र मजबूत बनेगा।

2. परिवार प्रबोधन: भारतीय संस्कृति की मूल शक्ति परिवार व्यवस्था है। आधुनिक जीवनशैली के बीच परिवारों में संवाद, संस्कार, बुजुर्गों का सम्मान और बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास अत्यंत आवश्यक है। संस्कारित परिवार ही संस्कारित समाज का निर्माण करते हैं।

3. स्वदेशी भावना एवं आत्मनिर्भरता: स्थानीय उत्पादों, परंपरागत कौशल और स्वदेशी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त की जा सकती है। आत्मनिर्भर भारत का निर्माण समाज की सहभागिता से ही संभव है।

4. पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति संवर्धन: भारतीय संस्कृति प्रकृति को पूजनीय मानती है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा, वृक्षारोपण तथा पर्यावरण संतुलन को जीवनशैली का हिस्सा बनाना समय की मांग है।

5. नागरिक कर्तव्य बोध: अधिकारों के साथ-साथ नागरिक कर्तव्यों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी एवं राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की भावना प्रत्येक नागरिक में विकसित होनी चाहिए।

उनके उद्बोधन ने विशेष रूप से युवाओं एवं महिलाओं को समाज परिवर्तन की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जगाई राष्ट्र चेतना

विराट हिंदू सम्मेलन केवल वैचारिक मंच ही नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का जीवंत उत्सव भी बना। भारत माता को समर्पित विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।


कार्यक्रम में रागवी डांस अकादेमी द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना, कांतारा नृत्य ने भारतीय परंपरा एवं लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की, वहीं ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने राष्ट्र सुरक्षा एवं बलिदान की भावना को जीवंत किया तथा ऊर्जा से भरपूर छावा नृत्य ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उत्साह उत्पन्न किया। जमुई सेंट्रल स्कूल के छात्रों ने भारत माता जयघोष की पिरामिड प्रस्तुति दी ।

इन प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली जीवंत शक्ति है।

पुस्तक लोकार्पण: संस्कार एवं परिवार केंद्रित पहल

सम्मेलन के विशेष आकर्षण के रूप में नवप्रकाशित पुस्तक छोटे कदम, सुनहरा सफर (180 दिन की शिशु गाथा) का लोकार्पण किया गया। पुस्तक के लेखक समाज वैज्ञानिक डॉ. गौरव कुमार एवं शिक्षिका बबली कुमारी ने बताया कि यह पुस्तक सनातन संस्कृति में निहित पारिवारिक संस्कारों, शिशु स्वास्थ्य, देख-रेख एवं सकारात्मक पालन-पोषण की भारतीय पद्धतियों पर आधारित है। यह पुस्तक नव अभिभावकों को शिशु के जन्म से प्रारंभिक विकास तक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन प्रदान करती है तथा भारतीय परिवार व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

सामाजिक संवाद का सशक्त मंच

सम्मेलन के दौरान समाज जीवन से जुड़े विभिन्न विषयोंशिक्षा, संस्कृति, परिवार, युवा नेतृत्व, मातृभाषा एवं सामाजिक उत्तरदायित्वपर सार्थक संवाद हुआ। यह आयोजन केवल एक सभा न रहकर सामाजिक चिंतन और सामूहिक संकल्प का मंच बन गया। कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन अनुशासित एवं प्रेरणादायी शैली में किया गया, जिसने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और ऊर्जावान बनाए रखा।

राष्ट्र निर्माण का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन स्थानीय निवासी चंद्र्कांत जी ने प्रस्तुत किया गया तथा भारत माता की सामूहिक आरती के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। आयोजकों ने इसे सामाजिक जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को संगठित करने का संकल्प व्यक्त किया।


विराट हिंदू सम्मेलन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब समाज अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों के प्रति जागरूक होता है, तब राष्ट्र स्वतः सशक्त बनता है। आकांक्षी जिला जमुई में आयोजित यह सम्मेलन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक आत्मगौरव एवं राष्ट्र समर्पण की भावना का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से पर्यावरण भारती के संस्थापक रामविलास जी, कुंज बिहारी जी (माननीय विभाग संघचालक), फकीरा जी (माननीय नगर संघचालक), शिवम जी (नगर कार्यवाह), अजीत जी (जिला संपर्क प्रमुख), शिवदानी जी (कुटुंब प्रबोधन जिला संयोजक), अनुज जी (जिला प्रचारक) स्थानीय वक्ता के रूप में सरिता चौधरी जी, अनीता देवी जी, बेबी जी, सुनीता केशरी जी उपस्थित रहे। 

यह आयोजन न केवल एक कार्यक्रम था, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय पुनर्जागरण की दिशा में बढ़ता हुआ एक सशक्त कदम सिद्ध हुआ वास्तव में छोटे कदम, सुनहरा सफर की भावना को चरितार्थ करता हुआ।






लेखक -            डॉ. गौरव कुमार

आईसीएसएसआर पोस्ट डोकटोरल फैलो, डॉ. बी आर अंबेडकर कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय)