आधुनिक काल में समाज कार्य का इतिहास - History of Social Work in the Modern Period
आधुनिक काल में समाज कार्य का इतिहास - History of Social Work in the Modern Period
स्वतंत्रता प्राप्ति पश्चात के काल को हम आधुनिक काल के रूप में देख रहे हैं। इस काल के प्रारंभ से ही सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं विकास जैसे अनेक कार्यक्रमों को समूह कार्य के क्षेत्र में प्रारंभ किया गया। बच्चों, युवाओं एवं वृद्धों के लिए अनेक प्रकार के कार्यक्रमों को चलाया गया। बच्चों के लिए एन.सी.सी., एन.एस.एस., गर्ल्स स्काउट ब्वायज स्काउट आदि संगठनों को बनाया गया। युवाओं के कल्याण हेतु युवा कल्याण निदेशालय एवं नगरों में युवक कल्याण समितियाँ बनाई गई। जो महिला नौकरी करने के लिए जाती थी उनके लिए अलग से मनोरंजन आवास गृहों का निर्माण किया गया। वृद्धों लिए देवा केंद्रों का निर्माण किया गया, जिसके माध्यम से वृद्ध एक-दूसरे के साथ मिलकर जीवन यापन कर सकें, तो इस प्रकार से अनेक कार्य स्वतंत्रता के पश्चात होने लगे। यदि व्यावसायिक एवं औपचारिक रूप से देखा जाए तो समाज कार्य का प्रारंभ बीसवीं शताब्दी में ही हुआ जबमुंबई में एक संस्था सोशल सर्विस लोग ने छह सप्ताह का संक्षिप्त पाठ्यक्रम समाज कार्यकर्ताओं के लिए चलाया। उन्हें प्रशिक्षण देकर समाज की वर्तमान समस्याओं से लड़ने के लिए सक्षम बनाया। तत्पश्चात 1936 में सर दोराबजी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ सोशल वर्क की स्थापना मुंबई के एक स्लम क्षेत्र देवनार में की गई। इस संस्था का मुख्य उद्देश्यसमाज कार्य को एक व्यावसायिक सेवा प्रदान करने वाले यंत्र के रूप में विकसित करना है, जिससे समाज कार्य को एक व्यावसायिक रूप प्रदान किया जा सके और कार्यकर्ताओं में व्यावसायिक गुण विकसित किए जा सके। समाज कार्य करते समय समाज कार्य की मुख्य प्रणालियों (सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य, सामाजिक समूह कार्य सामुदायिक संगठन सामाजिक क्रिया, समाज कल्याण प्रशासन और सामाजिक शोध) का प्रयोग कर समाज में व्यक्ति समूह और समुदाय की समस्याओं का उचित समाधान किया जा सके।
वर्तमान में वह विद्यालय टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ सोशल साइन्स के नाम से जाना जाता है और यहाँ समाज कार्य से संबंधित बीएस.डब्ल्यू. एम.एस.डब्ल्यू.. एम. फिल. एवं पीएच. डी. तक की औपचारिक शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके साथ स्वतंत्र भारत में संस्थाओं का खुलना प्रारंभ हो गया और 947 में दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क की स्थापना की गई। इसी वर्ष काशी विद्यापीठ में समाज विज्ञान संकाय के अंतर्गत समाज कार्य विभाग खुला जिसमें बी.एस.डब्ल्यू., एम.एस.डब्ल्यू. एम. फिल. एवं पीएच.डी. तक संपूर्ण अध्ययन कार्य कराया जाता है। 1949 में लखनऊ विश्वविद्यालय में समाज कार्य में शिक्षा प्रारंभ हुई। इसके पश्चात देश के अन्य विश्वविद्यालयों, जैसे आगरा, इंदौर, मद्रास, पटना, कलकत्ता, जबलपुर, महाराष्ट्र (मुंबई, नागपुर, वर्धा इत्यादि) जगह पर समाज कार्य पाठ्यक्रमों को प्रारंभ किया गया जिसमें औपचारिक शिक्षा के माध्यम से व्यावसायिक एवं क्षेत्र कार्य आधारित शिक्षा प्रदान की जाती है। 1960 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपनी एक समिति नियुक्त की, जिसने अपने प्रतिवेदन में यह संस्तुति की है कि समाज कार्य की शिक्षा अन्य विद्यालयों में पूर्व स्नातक स्तर पर भी होनी चाहिए।
भारत में समाजकार्य के विद्यालयों का विकास मुख्य रूप से स्वतंत्रता के पश्चा हुआ है। 1948 तक केवल टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ सोशल साइन्स में ही समाज कार्य संबंधी शिक्षा दी जाती थी परंतु 1958 में समाज कार्य के 6 विद्यालय, 1958 में 13, 1961 में 20 और अब लगभग 25 विद्यालय है, जिनमें से 17 में केवल समाज कार्य की शिक्षा दी जाती है और 8 में अन्य प्रकार की संबंधी शिक्षा भी प्रदान की जाती है (पाण्डेय, 2010 60) वर्तमान समय में समाज कार्य के क्षेत्र में अब नयापन आने लगा है और समाज कार्य क्षेत्र में जाकर अभ्यास कार्य कराया जाने लगा है, जिससे विद्यार्थियों को समाज कार्य के संबंध में व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त हो सके। वे समाज में उत्पन्न समस्याओं का समाधान करने में सक्षम बन सके। आज आवश्यकता है कि समाज कार्य जैसे पाठ्यक्रमों का व्यावहारिक पक्ष मजबूत किया जाए और जिससे समाज कार्य को प्रत्येक संकटग्रस्त व्यक्ति तक पहुंचाया जा सके।
दक्षिण पूर्व एशिया
दक्षिण-पूर्व एशिया के अंतर्गत इंडोनेशिया मलेशिया, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, सिंगापुर फिलीपींस, थाइलैंड तथा वियतनाम जैसे देश आते हैं। यहाँ हम इंडोनेशिया एवं मलेशिया देशों का विशेष तौर से वर्णन करेंगे, जहाँ समाज कार्य एक विषय के रूप में विकसित हुआ है।
इंडोनेशिया
इंडोनेशिया विश्व का चौथा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है जो चीन भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। 17 अगस्त, 1945 को इंडोनेशिया स्वतंत्र हुआ। यह देश सांस्कृतिक विविधताओं से भरा पड़ा है। यहाँ350 से अधिक मान्यताप्राप्त नस्लीय भाषाई समूह है। इंडोनेशिया में सर्वाधिक 88 प्रतिशत मुसलमान 8 प्रतिशत ईसाई, 2 प्रतिशत हिंदु तथा प्रतिशत बौद्ध तथा प्रतिशत में अन्य धर्मावलंबी है। इंडोनेशिया में साक्षरता दर88.5 प्रतिशत से 90.2 प्रतिशत के बीच, जन्मदर 21.1 प्रति 1000 जीवित जन्म दर मृत्युदर 626 शिशु मृत्युदर 46, जीवन प्रत्याशा पुरुषों में 68.8 तथा महिलाओं में 71.8 वर्ष है। अन्य देशों की तरह इंडोनेशिया में सामाजिक समस्याओं का अनुभव करने वाले तथा उन देने की आवश्यकता वाले लोगों की संख्या बढ़ी, जिसके फलस्वरुप समाज कार्य अस्तित्व में आया। स्वतंत्रता के बाद अनेक गैर सरकारी संगठनों ने सामाजिक समस्याओं के निर्मूलन हेतु कार्य किया।
इंडोनेशिया में समाज कार्य को एक व्यवसाय के रूप में 1957 में बांग में समाज कार्य के क्षेत्र में प्रशिक्षण ग में कार्यक्रम प्रारंभ होने पर मान्यता प्राप्त हुई। इसमें मुख्य रूप से दो व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरु किए गए थे। एक तो सामाजिक कर्मचारियों के लिए प्रारंभिक स्त्र का पाठ्यक्रम तथा दूसरा कुशल सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए उच्चस्तरीय पाठ्यक्रमा सामाजिक मामलों के मंत्रालय के कर्मचारियों को एक वर्ष या 2 वर्ष का प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम तैयार किया गया। बांदुंग मॉ964 में स्कूल ऑफ सोशल वेलफेयर की स्थापना समाज कार्य में स्नातक तथा परास्नातक कार्यक्रम प्रदान करने के लिए की गई। वर्तमान में इंडोनेशिया में लगभग 35 सार्वजनिक तथा निजी विश्वविद्यालय समाज कार्य एवं समाजकल्याण में स्नातक कार्यक्रम प्रदान कर रहे हैं। स्कूल ऑफ सोशल वेलफेयर, स्टेट इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ सुनान काली जागा, जकार्ता समाज कार्य में मास्टर डिग्री प्रदान करते हैं। मलेशिया में सर्वाधिक 51.1% मलब, 24.1% चीनी तथा 7% भारतीय तथा 18% गैर मलेशियाई नागरिक रहते हैं। यह देश 1957 में अंग्रेजी शासन से आजाद हुआ। मलेशिया में 1940 ई. तक विभिन्न कल्याण सेवाएं, जातीय, नस्ल तथा धार्मिक दान संगठनों के माध्यम से दी जाती थी। वहाँ समाज कार्य व्यवसाय देश में जरूरत के अहसास को देखकर 1940 में प्रारंभ हुआ। यूरोपीय कल्याण राज्य की अवधारणा तथा द्वितीय विश्व युद्ध के संकट ने इसको जन्म दिया। 1946 में मलेशिया में ब्रिटिश प्रशासन ने एक अलग विभाग के रूप में समाज कल्याण को विकसित किया। यहाँ समाज कार्य शिक्षण का प्रारंभ समाज कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की प्रशिक्षण की आवश्यकता से हुआ। प्रारंभ में समाज कल्याण अधिकारी अंग्रेज थे जिन्हें सामाजिक सेवा में प्रशिक्षण हेतु दो वर्षीय कार्यक्रम के अध्ययन के लिए लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जाना पड़ता था।
यहाँ समाज कार्य ज्ञान के बजाए सामाजिक आवश्यकताओं पर जोर देता था। पहली बार 1985 में दो स्थानीय लोग स्नातक लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स तथा इसके बाद दो स्वॉसिया विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित हुए। सिंगापुर में मलाया विश्वविद्यालय ने समाज कार्य में सर्टिफिकेट कोर्स, अर्थशास्त्र विभाग के अंदर स्थापित किया। यही पाठ्यक्रम 1952 में दो वर्षीय डिप्लोमा के रूप में उच्चीकृत हुआ। अंग्रेजी शासन ने 1952 में समाज कल्याण विभागों के कमचारियों को यहाँ भेजना प्रारंभ किया। मलाया विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग ने 1957 तथा 1968 में एक वर्षीय परास्नातक डिप्लोमा तथा स्नातक उपाधि पाठ्यक्रम प्रारंभ किया। मलेशिया में नेशनल सांइस विश्वविद्यालय ने 1976 में सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यम मे रखकर स्नातक पाठ्यक्रम "सामाजिक विकास प्रशासन का प्रारंभ इस क्षेत्र को पुन स्थापित करने के उद्देश्य से किया। पूर्व एशिया को देखा जा सकत पूर्व एशिया के क्षेत्र में चीन एवं जापान के समाज कार्य को देखा जा सकता है।
एशिया में समाज कार्य का इतिहास - History of Social Work in Asia
इन क्षेत्रों में समाज कार्य के क्षेत्र में अनेक कार्य किए गए जिनका संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार से है चीन चीन में समाज कार्य की शुरूआत मुख्यरूप से 1921 में मानी जाती है। जब सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य की प्रक्रिया द्वारा गोद लेने की परंपरा का प्रारंभ हुआ। 1930 के दशक में समाज कार्य के कई विश्वविद्यालयों को प्रारंभ किया गया। चूंकि चीन में कल्याण-क्रियाकलाप राजनीतिक अभिमुखता से प्रभावित थे, इसलिए तीस वर्षों तक चीन का पश्चिमी समाज कार्य से कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका।(लीयंग 1995 )| 1984 में प्रथम बार समाज शास्त्र से संबंधित पुस्तक का प्रकाशन किया गया जिसमें समाज कार्य एक व्यावहारिक समाज शास्त्र के नाम से इंगित हुआ 1886 में चीनी गणराज्य द्वारा समाज कार्य तथा प्रबंधन शीर्षक के एक विषय को जोड़ने का निर्णय लिया संपूर्ण चीन में समाज कार्य के व्यावसायिक क्षेत्रों में बढ़ोतरी हेतु एक शैक्षिक संघटन द चाइना एसोशिएसन ऑफ सोशल वर्क एजुकेशन 1994 में स्थापित किया गया। 2002 तक चीन में लगभग 90 से अधिक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में समाज कार्य से संबंधित पाठ्यक्रमों को प्रारंभ किया जा चुका था जिसके माध्यम से कार्यकर्ताओं समाज कार्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित किया जाता रहा है।
जापान के इतिहास पर यदि नजर डाली जाए तो प्रतीत होता है कि जापान में दान कर्म जैसी धार्मिक गतिविधियाँ हमेशा नजर आती है। चीन के माध्यम से भारत से आए बौद्ध धर्म के मानने वाले लोगों ने बौद्ध मंदिरों द्वारा जरूरतमंद लोगों को देखभाल मुहैया कराई। आगे चलकर सरकार ने भी इस क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया और इस हेतु नीतियों का निर्माण करना प्रारंभ किया। फलस्वरूप 1929 में सेंट्रल सोशल वर्क एसोसिएशन" का निर्माण किया गया, जिसके माध्यम से कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाने लगा। तत्पश्चात इसे ही जापान का प्रथम समाज कार्य स्नातक विद्यालय माना गया। इसी के पश्चात समाज कार्य का प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पेरिस में हुआ। जापान ने 1932 में सार्वजनिक सहायता कार्यक्रम की शुरूआत की। द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ और उसके फलस्वरूप 'सेंट्रल सोशल वर्क एसोशिएशन बंद कर दिया गया। यद्यपि अगस्त 1945 में युद्ध समाप्त हो गया था सहशक्तियों ने देश पर कब्जा कर लिया था। महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों, जो युद्ध के कारणबंद कर दिए गए थे ने धीरेधीरे अपने को पुर्नस्थापित करना प्रारंभ किया 1950 में ‘‘डोशिशा विश्वविद्यालय’’ ने समाज कार्य में प्रथम स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किया। जापान में आर्थिक सुधार के साथ समाज कल्याण सेवाओं का विकास हुआ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिमी देशों तथा समाजवादी देशों के बीच हो रहे शीतयुद्ध के एक परिणाम स्कूप इसका उद्भव हुआ और धीरे-धीरे समाज कार्य एक व्यवसाय के रूप में विकसित होता गया।(मीडा, 1995)।
प्राचीन काल में समाज कार्य का विकास - Development of social work in ancient times
मध्य एशिया मध्य एशिया क्षेत्र के अंर्तगत रूस कजाखस्तान, उजबेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान इत्यादि देशों को सम्मिलित किया जाता है। इन तमाम देशों में समाज कार्य केवल रूस में ही अपना प्रभाव स्थापित कर पाया। इसके अतिरिक्त अन्य देशों में इसके महत्व को कम ही देखा जा सकता है। रूस जिस रूप में समाज कार्य यूरोपीय देशों में देखा जाता है एवं जिस प्रकार से इन देशों में समाज कार्य को मान्यता प्राप्त है उस प्रकार से कभी भी सोवियत संघ में समाज कार्य का रूप नहीं देखा गया। चिकित्सा एवं शिक्षा के क्षेत्र जैसे विषयों में कार्य करने वाला यहाँ कोई भी प्रशिक्षित कार्यकर्ता नहीं था और न ही किसी संस्था के साथ कार्य करने वाला कोई कार्यकर्ता था। 12 जून 1991 को सोवियत संघ के विघटन पश्चात रूस में समाज कार्य को देखा जा सकता है। रूस में लम्बेसमय से बने आर्थिक संकट और बढ़ते सामाजिक विभेदीकरण को ध्यान में रखते हुए 1991 में शैक्षणिक कार्यक्रम के रूप में समाज कार्य को प्रारंभ किया गया। (असंकाइया एट्रअल, 2004) रूस में समाज कार्य के शिक्षण के रूप में पंचवर्षीय वैशिष्ट्य कार्यक्रम उपलब्ध है इसके साथ-साथ कुछ विश्वविद्यालयों में स्नातक कार्यक्रम एवं तीन विश्वविद्यालयों में एम.ए. कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं अर्सकाइया एटअल, 2004)
मध्य काल में समाज कार्य का इतिहास - History of Social Work in the Middle Ages
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