सामाजिक नीति : Social Policy
सामाजिक नीति : Social
Policy
सामाजिक नीति को लेकर बहुत स्पष्टता
नहीं रही है। इसके बजाय आर्थिक स्थिति को बहुत प्राथमिकता प्रदान की जाती है। इसे
कई बार सामाजिक दुर्घटनाओं या बाजार के असंतुलम सफल होने पर उत्पन्न सामाजिक
समस्याओं के उपाय के रूप में देखा जाता है। सामाजिक नीति को लेकर प्रतिष्ठित विचार
यह रहा है कि सामाजिक नीति का अर्थ सामाजिक सेवाओं तक सबकी पहुँच बनाना सामाजिक
सुरक्षा उपलब्ध कराना तथा समाज के वंचित तबके के हितों की रक्षा करना है। जबकि
नवीन दृष्टिकोण इसे व्यापक बनाते हुए इसमें मानवाधिकार, सतत विकास, सूचना का अधिकार इत्यादि मुद्दों को भी
शामिल करता है। नवीन दृष्टिकोण उन समस्तजन नीतियों और कार्यक्रमों को अपने अध्ययन
का विषय बनाता है जो सामाजिक समता के लिए आवश्यक है।
वस्तुत: सामाजिक नीति असमानता के प्रति
मुखर स्वर एवं हस्तक्षेप है। यह हर तरह की असमानता को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध
है। यह अंतरानुशसनिक विषय है क्योंकि यह विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य क्षेत्र में संसाधनों की पहुँच वितरण, नियंत्रण पर अपना ध्यान केंद्रित करती
है। यह अध्ययन विषय के साथ-साथ व्यावहारिक विषय भी है। एक अध्ययन विषय के रूप में
सामाजिक नीति
को पढ़ाया जाता है तो दूसरी ओर सरकारों
विभिन्न संगठनों द्वारा सामाजिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सामाजिक को लागू भी
किया जाता है और उनका मूल्यांकन भी होता है।
सामान्य तौर पर सामाजिक नीति का कार्य
सभी नागरिकों को उन न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है जो एक मनुष्य के
रूप में व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। यह अपने में सामाजिक जीवन को भी
समाहित करती है। यह व्यक्तियों और समुदायों के सशक्तिकरण का उद्देश्य रखती है और
इस हेतु परिवर्तन पर जोर देती है। ऐसा करने में यह जन समुदाय की सक्रिय भागीदारिता
को भी शामिल करती है जिससे सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति संभव हो सके। सामाजिक
नीति सामाजिक न्याय को पुष्ट करती है। सामाजिक नीति अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में
आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नवीन दिशा प्रदान करती है जिससे इन दोनों विकास के
लाभ समाज के वंचित वर्ग को प्राथमिकता के आधार पर मिल सके।
सामान्यत: 'नीति' शब्द का तात्पर्य उन मार्ग निर्देशों/सिद्धांतों से होता है जो सरकार
और अन्य संस्थाओं के क्रियाकलापों को दिशा प्रदान कर वांछित लक्ष्यों की प्राप्ति
करते हैं। जब हम बहुवचन के रूप में सामाजिक नीति की बात करते हैं तो इसका तात्पर्य
सभी वर्गों की लिए विभिन्न क्षेत्रों में निर्धारित नीतियों के समुच्च्य से होता
है मसलन स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नीतियां।
परन्तु जब एकवचन के रूप में सामाजिक नीति का प्रयोग करते है तब इसका तात्पर्य किसी
खास वर्ग से संबंधित नीतियों से होता है मसलन- अनुसूचित जातियों और अनुसूचित
जनजातियों से संबंधित नीतियां अनिवार्य बाल शिक्षा से संबंधित नीतियां इत्यादि ।
सामाजिक नीति के लक्ष्य एवं कार्य
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